बिचौलिए के मोबाइल नंबर की सीडीआर खंगाली जा रही है। जिससे ये कनेक्शन मिल सके कि वह संबंधित पुलिसकर्मियों के संपर्क में रहा। हालांकि जांच में तेजी नहीं है। जांच सिर्फ निपटाई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक पहले ही सभी को मौखिक रूप से क्लीन चिट दे दी गई है। कागजों की कार्रवाई पूरी करना बाकी है।
सीडीआर से कनेक्शन निकालना आसान नहीं
आमतौर पर पुलिस अधिकारी अब व्हाट्सएप कॉल पर बातचीत करते हैं। इस तरह के बिचौलिए से अफसर सूझबूझ से संपर्क रखते हैं। किसी न किसी के जरिये ही बातचीत करते हैं। जो भी बातचीत होती है वह व्हाट्सएप कॉल पर होती है। वहीं, एक बात और इस मामले में अहम है।
जिस बिचौलिए का नाम सामने आ रहा है, अफसरों का कहना है कि उसी ने रिजवान को पकड़वाया भी है। ऐसे में उससे बातचीत होना लाजमी भी है। ऐसे में कॉल से कनेक्शन अगर मिलता भी है तो भी बचाव करने में आसानी होगी।
पहले इनकार किया फिर गोपनीय तरीके से जांच दी
जब ये पूरा मामला उजागर हुआ था तब उच्चाधिकारियों ने जांच कराने की बात खारिज कर दी थी। दावा करते रहे कि आरोप निराधार हैं। मगर गोपनीय तरीके से जांच के आदेश दिए गए। ये भी समझ से परे है। सवाल है कि जब मामला गंभीर है तो उसकी जांच गंभीरता से क्यों नहीं कराई जा रही है।