कानपुर देहात। जिले में एक तरफ एंबुलेंस का चक्काजाम और बाबू समेत संविदा स्वास्थ्य कर्मी हड़ताल पर हैं। दूसरी ओर अब अस्पतालों में डॉक्टरों की मनमानी भी शुरू हो गई है। मंगलवार को जिला महिला अस्पताल/मेटरनिटी विंग की एक ओपीडी से डॉक्टर नदारद रहीं। जिससे दूरदराज से आई महिलाओं को परेशान होना पड़ा।
तीस बेड के जिला महिला अस्पताल को नियम विरुद्ध सौ शैया मेटरनिटी विंग में शिफ्ट कर एक साथ चलाया जा रहा है। मौजूदा समय में वहां पर दो ओपीडी संचालित की जा रही हैं, जबकि महिला अस्पताल में जिलेभर से हर रोज सैकड़ों महिलाओं व प्रसूताओं की आवाजाही रहती है। मंगलवार की दोपहर करीब पौने बारह बजे ओपीडी कक्ष दो में डॉ. सीमा शुक्ला मरीजों को देखती मिलीं। जबकि ओपीडी कक्ष तीन में डॉ. फरजाना नहीं थी। वहां बड़ी संख्या में महिलाओं को उमस भरी गर्मी मेें इंतजार करना पड़ रहा था। कर्मियों ने बताया कि डॉक्टर ऑपरेशन थियेटर में गई हैं। दिखाने आई मरीज सरिता, आशा आदि ने बताया कि ओपीडी के समय अक्सर डॉक्टर चली जाती हैं। पूछने पर ओटी मेें होने का हवाला देकर घंटों इंतजार कराया जाता है। दूसरे डॉक्टर का वैकल्पिक इंतजाम भी नहीं किया जाता है। ऐसे में कई बार बिना दिखाए ही लौटना पड़ता है।
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बयान-
ओटी में लगी डॉक्टर अक्षम थी। जिस कारण एक केस में ओपीडी की डॉक्टर फरजाना को ओटी में भेज दिया था। कोविड हेल्प डेस्क कर्मी के अवकाश पर होने के कारण आने वाले मरीजों के तापमान की जांच नहीं हो सकी।
- डॉ. वंदना सिंह (सीएमएस, जिला महिला अस्पताल)
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इंसेट-
कोरोना संक्रमण को बढ़ा रहा महिला अस्पताल
कोरोना से बचाव का जिम्मा उठाने वाले ही संक्रमण को बढ़ावा दे रहे हैं। मंगलवार को जिला महिला अस्पताल/मेटरनिटी विंग में बनी कोविड हेल्प डेस्क से कर्मी पूरे दिन नदारद रहा। बाहर लगे गार्ड मरीजों को हेल्प डेस्क पर तापमान जांच कराने के लिए भेज देते। मरीज वहां घंटों इंतजार करते। जांच न होने पर वह सीधे डॉक्टर कक्ष, लैब आदि जगहों पर आवागमन करते रहे।