हंसपुर नौबस्ता की पांच बीघा जमीन के मालिकाना हक के एक मामले की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीएम डॉ. रोशन जैकब, एडीएम और एसडीएम सदर योगेंद्र कुमार के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। यह जांच कानपुर मंडल के मंडलायुक्त मो. इफ्तेखारुद्दीन को दी गई है।
जांच तीन महीने के अंदर पूरी करके हाईकोर्ट को देनी है। मामले की अगली सुनवाई छह जुलाई को होनी है। हंसपुर नौबस्ता की आराजी संख्या 301/1 की पांच बीघा जमीन रामचंद्र चौरसिया के नाम दर्ज है। इसकी पॉवर आफ अटार्नी रामचंद्र के बेटे मेहेरदीप चौरसिया के नाम है।
मेहेरदीप ने इसी जमीन का मालिकाना हक मांगा। इस पर आपत्ति करते हुए सदर तहसील और जिले के अधिकारियों ने पुराने रिकार्ड में बदलाव करा दिया। पुराने रिकार्ड में राम स्वरूप का नाम दर्ज करा दिया, जो कि दबंग बताए जाते हैं। इसको लेकर ही मेहेरदीप हाईकोर्ट चले गए। पुराने और नए रिकार्ड को आधार बनाकर याचिका दाखिल की।
इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मेहेरदीप के पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बावजूद प्रशासनिक अधिकारी मालिकाना हक देने को तैयार नहीं हुए। इसके बाद याची ने हाईकोर्ट में ही अवमानना याचिका दाखिल कर दी। इसमें डीएम, एडीएम, एसडीएम और एक लेखपाल को पक्षकार बनाया गया है।
इस पर जस्टिस राजेश दयाल खरे ने 26 मार्च को सुनवाई की। हाईकोर्ट ने कहा कि हलफनामे के साथ दाखिल राजस्व अभिलेख और प्रमाणित दस्तावेज एक दूसरे से मेल नहीं खा रहे हैं। यह मामला गंभीर है। इसकी जांच करके रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में हाईकोर्ट के समक्ष पेश की जाए।
जांच कानपुर मंडल के मंडलायुक्त या फिर उनके द्वारा नामित सक्षम अधिकारी को करनी है। हाईकोर्ट के आदेश की प्रमाणित प्रति दो सप्ताह के अंदर हाईकोर्ट को उपलब्ध करा दी जाएगी।