41 घरों में मच्छर का लार्वा मिला
वहां दवा का छिड़काव करा दिया जा रहा है। विभिन्न क्षेत्रों के 41 घरों में मच्छर का लार्वा मिला है। उसे नष्ट करा गया। एक रोगी की मौत के बाद सिकठिया गांव में निशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण कैंप लगाया गया। गांव में 26 रोगियों के सैंपल लिए गए। इनमें 16 मलेरिया और पांच सैंपल डेंगू की जांच के लिए भेजे गए हैं।
डेंगू को पकड़ने के लिए की जा रही डबल जांच
डेंगू के लक्षण वाले सौ रोगियों की जांच होने पर दो से पांच फीसदी ही को संक्रमण की पुष्टि हो रही है। रोगी निगेटिव निकल रहे हैं। इनमें सभी लक्षण डेंगू के रहते हैं। जो रोगी आ रहे हैं, उनके बुखार की अवधि बताने पर ही डॉक्टर तय करते हैं कि एनएस-1 जांच होगी कि आईजीएम।
बुखार आने की अवधि एक से लेकर पांच दिन
अगर रोगी ने धोखे से बुखार आने की अवधि गलत बता दी, तो इन दो जांचों में कोई एक करने पर रिपोर्ट निगेटिव आ सकती है। स्थिति को देखते हुए जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के माइक्रो बाॅयोलॉजी विभाग ने अब दोनों जांचें करनी शुरू कर दी हैं। जिला मलेरिया अधिकारी एके सिंह ने बताया कि प्रोटोकॉल के लिहाज से अगर बुखार आने की अवधि एक से लेकर पांच दिन है, तो एनएस-1 जांच की जाती है।
माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग दोनों जांचें कर रहा है
अगर पांच दिन से अधिक हो गए तो आईजीएम जांच होती हैं। आईजीएम एंटीबॉडी टेस्ट होता है। रोगी में एंटीबॉडी पांच दिन के बाद बनती है। इसके पहले एंटी बॉडीज नहीं होती। एनएस-1 में एंटीजन की जांच होती है। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज का माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग दोनों जांचें कर रहा है। अगर रोगी बुखार की अवधि गलत बताता है तो भी डेंगू का संक्रमण पता चल जाएगा।