हरजीत सिंह मुहैया करता था खाते
इसके बाद उन्हें महंगे आईफोन, लैपटॉप, घड़ी, इंगेजमेंट रिंग, ज्वैलरी और विदेशी करेंसी भेजने की बात कहता। फिर एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग द्वारा पकड़े जाने की बात कहकर अपने साथियों की मदद से रुपये खातों में ट्रांसफर करा लिया करता था। इसके लिए महावीर इन्क्लेव पालम निवासी हरजीत सिंह उन्हें खाते मुहैया करता था।
सरकारी और निजी बैंकों में मिले खाते
एडिशनल डीसीपी क्राइम मनीष सोनकर ने बताया कि अब तक की जांच में छह बैंक खातों की जानकारी मिली है। ये सभी खाते निजी बैंक में खोले गए थे, लेकिन खातों में फर्जी दस्तावेज लगाए जाने के कारण पुलिस गैंग को नहीं पकड़ सकी। अब पुलिस उन बैंकों से खातों को होल्ड कराकर पिछले सालों में हुए लेन-देन के बारे में पड़ताल करने में लगी है। जालसाज झांसे में लेने के लिए सिटी बैंक ऑफ इंडिया के नाम से मेल भी भेजते थे।