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यहां डाकुओं की मौत की वजह बन गई है बरसात, कईयों का हो चुका खात्मा

Mon, 07 Aug 2017 03:32 PM IST
टीम डिजिटल,अमर उजाला, कानपुर
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डेमो
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इसे आप भले ही इत्तफाक समझे लेक‌िन च‌ित्रकूट में एक बार फ‌िर सावन डाकूओंं के ल‌िए बड़ा नुकासानदायी साब‌ित हुआ है। इस मौसम में कई कुख्यात डाकू मारे जा चुके हैं। पिछले महीने डाकू गोप्पा को पकड़ने में कामयाबी मिली थी। इस बार 50 हजार के इनामी डाकू ललित पटेल को मारने में कामयाबी मिली है। इससे पहले दस्यु ददुआ, ठोकिया, रागिया और बलखड़िया सभी सावन के द‌िनों में ही पुल‌िस की गोली का श‌िकार हुए हैं। 
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यूपी-एमपी पुलिस की मेहनत रंग लाई 
उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में दस्यु सरगना ललित पटेल का रव‌िवार को खात्मा हो गया। यूपी व मप्र पुलिस की मेहनत रंग लाई। दोनों प्रदेश के उच्चाधिकारियों ने 1 लाख के इनामी बदमाश ललित पटेल को पकड़ने के लिए जाल बिछा दिया था। यूपी के डीजीपी सुलखान सिंह ने बांदा की समीक्षा बैठक में कहा था कि बहुत जल्द जिले से बदमाशों का खात्मा कर दिया जाएगा। यूपी क्षेत्र में पुलिस का अधिक दबाव होने से डाकू ललित पटेल मप्र क्षेत्र में ही रहता था। 

डाकू ललित पटेल ने जब से तीन ग्रामीणों को जिंदा जला दिया था, तभी पुलिस पीछे पड़ गई थी। इसके तीन साथियों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद गैंग के सरगना को पकड़ने के लिए रिश्तेदारों पर दबाव बनाई थी। उसके परिवार के दो सदस्यों को पुलिस पकड़कर लगातार पूछताछ कर रही थी, जिससे यह कामयाबी मिली। उसके मारे जाने की खबर मिलने से भरतकूप क्षेत्र के लोगों ने भी राहत की सांस ली है। इस क्षेत्र के प्रधानों व पत्थर खदान मालिकों से ललित पटेल अक्सर वसूली करता था। चित्रकूट एसपी प्रताप गोपेंद्र सिंह ने बताया कि दोनों जिले की पुलिस के संयुक्त प्रयास से ही डकैतों पर दबाव बढ़ा था और गैंग कहीं भाग नहीं पा रहा था आखिरकार ललित पटेल पुलिस के हाथों मारा गया।
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बारिश में फिर मिली कामयाबी 
पुलिस के लिए हमेशा बरसात का मौसम भाग्यशाली रहा है। इस मौसम में कई कुख्यात डाकू मारे जा चुके हैं। पिछले महीने डाकू गोप्पा को पकड़ने में कामयाबी मिली थी। इस बार 50 हजार के इनामी डाकू ललित पटेल को मारने में कामयाबी मिली है। 
गौरतलब है कि जुलाई व अगस्त में जिले के कई कुख्यात डाकू मारे जा चुके हैं। जिसमें शिवकुमार उर्फ ददुआ 23 जुुलाई,2007 को मारा गया था। अंबिका पटेल उर्फ ठोकिया 04 अगस्त, सुंदर पटेल उर्फ रागिया 15 जुलाई, स्वदेेश पटेल उर्फ बलखड़िया 2 जुलाई रामकरन पटेल उर्फ चच्चू 8 अगस्त हैं। यह खबर अमर उजाला ने कई बार छापी है। रविवार को डाकू ललित के मारे जाने के बाद फिर इसकी पुष्टि हुई है।

दो साल के अंदर दो को मारा 35 जिंदा पकडे़ 
डाकू ललित पटेल के मारे जाने के बाद से अब कुछेक डाकू ही बचे हैं। इधर पुलिस का मूवमेंट तो तेज हुआ है जिसके फलस्वरूप दो साल के अंदर जिले में किसी न किसी गैंग के 35 डाकू पकडे़ गये हैं। इनमें से दो 12-12 हजार और पांच बदमाश पांच हजार के इनामी हैं। मुठभेड़ में अब सरगना ललित मारा गया इसके पूर्व जिले के सरैंया जंगल में एक डाकू जयंत यादव मारा गया। डाकुओं के खिलाफ पुलिस व एसटीएफ को कामयाबी जुलाई में ही मिली। पुलिस अधीक्षक प्रताप गोपेंद्र के अनुसार मुठभेड़  में गोप्पा गैंग के दाहिना हाथ रहे खर दूषण, वरदानी, छोटवा को दबोचा गया था। इसके अलावा इसी गैंग के जयंत यादव को सरैया जंगल में मार गिराया गया था। दो साल के अंदर डकैतों के साथ प्रभावी कार्रवाई की। 2016 में छोटे बडे़ गैंग के 26 सदस्य और दो 2017 में अब तक 9 बदमाश दबोचे जा चुके हैं। डाकू की मदद में दस लोगों को पकड़ा गया है। इसमें दो 12-12 हजार व पांच डाकू पांच-पांच हजार के इनामी है।  

डाकुआें के खात्मे के थे आदेश
मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज इसी सप्ताह जब चित्रकूट आए थे उनसे पत्रकारों ने डाकओंं को लेकर सवाल किया था। जिससे उन्होंने कहा था कि मध्यप्रदेश में डाकुओं का नहीं शिव का राज होगा। इस दौरान धर्मनगरी के नेता व साधु-संताें मुख्यमंत्री से मिलकर क्षेत्र से डाकुओं के खात्मे के लिए कहा था। जिससे उन्होंने पुलिस अधिकारियों को डाकुओं को पकड़ने के लिए सख्त आदेश दिए थे। इसी का परिणाम रहा कि डाकू ललित पटेल जल्दी मारा गया। 

एसपी ने डाल दिया था डेरा 
जब से डाकू ललित पटेल ने तीन ग्रामीणों को गोली मारने के बाद जिंदा जला दिया था। उस घटना के बाद से सतना के पुलिस अधीक्षक  राजेश हिंगडलकर को कमान सौंपी गई थी। इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति से वाकिफ होने का लाभ उन्हें मिला और उन्होंने जिस तरह से मुख्यालय छोड़कर जंगलों मेें डेरा डाल दिया था। लोग कहने लगे थे कि डाकू ललित पटेल को पकड़ने के बाद ही एसपी इलाका छोडेंगे, यह बात सही निकली।
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