गोरखपुर कांड में चौतरफा घिरी सरकार विपक्ष की घेरेबंदी से असहज नजर आई। शहर की तीन हारी सीटों का चुनावी समीकरण साधने पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मनीष गुप्ता हत्याकांड पर सरकार का रुख स्पष्ट करना पड़ा। यह भी बताना पड़ा कि उनके कहने के बाद एफआईआर दर्ज की गई और बुधवार सुबह ही वह पीड़ित परिवार से मिलने की इच्छा जता चुके थे।
उनकी यह सफाई कुछ सवाल भी छोड़ गई। दरअसल, मुख्यमंत्री की गुरुवार को शहर में चुनावी सभा थी। उनके शहर पहुंचने से पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पीड़ित परिवार से मिलकर 20 लाख रुपये मदद का एलान किया और प्रदेश सरकार पर सवाल खड़े किए। इससे एक दिन पहले प्रदेश सरकार की ओर से 10 लाख रुपये की मदद भेजी गई थी। इसे लेने से पीड़ित परिवार ने इनकार कर दिया था।
विपक्ष की इस घेरेबंदी का असर रहा कि मुख्यमंत्री को यह कहना पड़ा कि उनके पूर्व निर्धारित कार्यक्रम से पहले घड़ियाली आंसू बहाने वालों से सावधान रहने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने जनसभा में कहा कि वे बुधवार सुबह ही कानपुर प्रशासन को फोन कर यह कह चुके थे कि वे पीड़ित परिवार से मिलेंगे। मुख्यमंत्री की यह स्वीकारोक्ति सवाल खड़े करती है कि जब वह खुद पीड़ित परिवार से मिलना चाह रहे थे तो जिला प्रशासन ने बुधवार रात तक ऊहापोह की स्थिति क्यों बनाकर रखी?