नेजल वैक्सीन ट्रायल के चीफ इन्वेस्टीगेटर प्रोफेसर जेएस कुशवाहा ने बताया कि वॉलिंटियरों को 28 दिन के बाद बुलाया गया है। रक्त और लार का सैंपल लेने के बाद उन्हें दूसरी डोज दी जाएगी।
कोरोना की नेजल वैक्सीन के ट्रायल का पहला चरण बुधवार को पूरा हो गया। पहले चरण में 50 वॉलिंटियर को शामिल किया गया। नाक में स्प्रे के जरिये वैक्सीन की डोज दी गई। 50 वॉलिंटियर को वैक्सीन देने के बाद रिपोर्ट आईसीएमआर को भेज दी गई।
विज्ञापन
नेजल वैक्सीन ट्रायल के चीफ इन्वेस्टीगेटर प्रोफेसर जेएस कुशवाहा ने बताया कि वॉलिंटियरों को 28 दिन के बाद बुलाया गया है। रक्त और लार का सैंपल लेने के बाद उन्हें दूसरी डोज दी जाएगी। स्वदेशी कोरोना वैक्सीन कोवाक्सिन की नेजल डोज का ट्रायल आर्य नगर स्थित प्रखर अस्पताल में किया गया।
प्रोफेसर कुशवाहा ने बताया कि ट्रायल में दो बार नाक से वैक्सीन की डोज दी जानी है। पहली और दूसरी डोज में वॉलिंटियर के नाक में कुल 16 बूंदें वैक्सीन की डाली जाएंगी। नेजल वैक्सीन होने के कारण वॉलिंटियर के रक्त के साथ लार का भी सैंपल लिया जाएगा। इसमें कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडीज देखी जाएगी।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि कोरोना का संक्रमण ज्यादातर लोगों में नाक से होता है। वायरल गले में आता है और फिर फेफड़ों में जाता है। नाक में वैक्सीन डालने से वायरस गले में नहीं उतर पाएगा। आंख और मुंह से संक्रमण होने पर भी वायरस गले से होकर ही फेफड़ों में जाता है। दावा किया कि नेजल वैक्सीन कारगर साबित होगी।