कानपुर में संदिग्ध हालात में भर्ती मेडिकल छात्रा की हालत गंभीर हो गई है। उसके जहरीला पदार्थ खाने की आशंका जताई जा रही है। उल्टी की शिकायत पर हैलट में भर्ती किया गया था। छात्रा जीएसवीएम में एमबीबीएस द्वितीय वर्ष में है। उसके पिता सबइंस्पेक्टर हैं और लखनऊ हाईकोर्ट में तैनात है।
उल्टियां होने की शिकायत पर शुक्रवार को हैलट में भर्ती की गई कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस द्वितीय वर्ष पैरा-2 की छात्रा तान्या सिंह की हालत अचानक गंभीर हो गई। रविवार देर रात उसे वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया गया है। आशंका है कि उसने हार्पिक या कोई दूसरा जहरीला पदार्थ पी लिया।
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उधर इस मामले को लेकर कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं। जिस युवक ने भर्ती कराया उसने पहले अपना और छात्रा का नाम गलत लिखाया। इसके अलावा किसी ने छात्रा का पिता बनकर उसे डिस्चार्ज करने का दबाव भी बनाया।
उप प्राचार्य डॉ. रिचा गिरि ने बताया कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उसने क्या खाया? फूड प्वॉइजनिंग की स्थिति है। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि समाज कल्याण हॉस्टल में उसे कमरा आवंटित था, लेकिन वह डे स्कॉलर थी और बाहर रहती थी। यह भी बताया जा रहा है कि उसका मनोरोग का इलाज चल रहा था।
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वहीं मेडिकल छात्रा की हालत बिगड़ने पर हड़कंप मच गया। सोमवार को प्राचार्य डॉ. संजय काला, उप प्राचार्य डॉ. रिचा गिरि और दूसरे अधिकारी उसे देखने पहुंचे। छात्रा में एक्यूट रेस्पेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (एआरडीएस) यानी सांस तंत्र में गड़बड़ी के लक्षण आने के साथ पेशाब में कीटोन आ रहा है। फेफड़ों में पानी भर गया।
आंतों में भी हल्की सी दिक्कत है। ब्लड प्रेशर कम है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि उल्टी के लक्षण आने पर छात्रा को शुक्रवार को इमरजेंसी में भर्ती किया गया। उसे अज्ञात युवक ने भर्ती कराया। अपना नाम प्रिंस गुप्ता लिखवाया और रिश्ते में भाई बताया। बाद में उसने भाई के स्थान पर दोस्त लिखवाया।
रोगी का नाम भी तान्या सिंह की जगह तान्या गुप्ता लिखवाया गया। पूछताछ में पता चला है कि रोगी को पहले किसी निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में उसे हैलट शिफ्ट किया गया।
डिस्चार्ज किए जाने को लेकर बनाया जाने लगा दबाव
डॉ. काला ने बताया कि प्रिंस नाम के जिस लड़के ने भर्ती कराया था, उसने यह भी बताया कि मनोरोग का भी इलाज चल रहा है। बाद में रोगी को डिस्चार्ज किए जाने के लिए दबाव बनाया जाने लगा। किसी ने पिता बनकर फोन किया कि उसे डिस्चार्ज कर दें, लखनऊ शिफ्ट करना चाहते हैं। जब अभिलेख निकलवाकर बात की गई तो पता चला कि उसके पिता कोई और हैं। तभी रोगी का सही नाम भी पता चला।
इसके अलावा निजी अस्पताल का डॉक्टर बनकर भी कोई उसे लखनऊ शिफ्ट कराने के लिए जोर डाल रहा था। बाद में जानकारी हुई कि उसके पिता सब इंस्पेक्टर हैं और लखनऊ हाईकोर्ट में तैनात हैं। यह भी बताया जा रहा है कि छात्रा बाहर परिवार के साथ रहती थी। डॉ. काला ने बताया कि छात्रा का मेडिको लीगल कराकर पुलिस और परिजनों को सूचना दे दी गई है।
पढ़ाई में पीछे, सभी विषयों में फेल
प्राचार्य का कहना है कि छात्रा तान्या सिंह पढ़ाई में अच्छी नहीं है। वह सभी विषयों में फेल हो गई थी। परीक्षा देने में भी दिलचस्पी नहीं दिखाती थी। उसकी कक्षा की छात्राओं ने बताया कि परीक्षा के दिन बार-बार फोन करके बुलाना पड़ता था। वह समाज कल्याण छात्रावास में रहती थी। डॉ. सीमा द्विवेदी ने बताया कि वह डे स्कॉलर रही है। उसके हाथ का पंजा नहीं है। डे स्कॉलर दिव्यांग बच्चों को छात्रावास में कमरा दे देते हैं, जिससे जरूरत पड़ने पर रह सकें। वैसे छात्रा नियमित छात्रावास में नहीं रहती।
अचानक गंभीर हो गई हालत
मेडिकल छात्रा मेडिसिन विभाग के डॉ. एमपी सिंह के अंडर में भर्ती है। उप प्राचार्य का कहना है कि शुरुआत में उसमें सामान्य गर्मी लगने जैसे उल्टियां आने के लक्षण थे। दो दिन के बाद अचानक हालत गंभीर हुई है। जो भी उसने खाया है, उसका असर दो दिन बाद तेज हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि उसके हार्पिक पी लेने की चर्चा है। रोगी इस स्थिति में नहीं है कि उसके खाने की नली से सैंपल लिया जाए।
तुम डॉक्टर बन जाओगी तो इंजेक्शन कैसे लगाओगी
छात्रा के जहर खा लेने के मामले में बड़ी बात निकलकर सामने आ रही है। स्वरूपनगर थाना प्रभारी राजेश शर्मा के अनुसार छात्रा के परिजनों ने कोई तहरीर नहीं दी है। हालांकि, उनसे पूछताछ में पता चला कि कॉलेज में पढ़ने वाले उसके कुछ साथी छात्र-छात्राएं एक हाथ से दिव्यांग होने के कारण छात्रा का मजाक उड़ाते थे। इसे लेकर वह काफी डिप्रेशन में थी। पिता ने पुलिस को बताया कि सहपाठी उससे कहते थे कि तुम्हारा एक हाथ तो खराब है...ऐसे में तुम जब डॉक्टर बन जाओगी तो मरीजों को इंजेक्शन कैसे लगाओगी।