पाठा क्षेत्र के नागर, बासा पहाड़, सीमा से सटे मध्यप्रदेश के धारकुंड़ी के जंगलों में बीते कई दिनों से आग धधक रही है। जिला प्रशासन के आग पर नियंत्रण के तमाम दावे गलत सबित हुए।
चित्रकूट जिले में पाठा क्षेत्र के जंगलों में बीते कई दिनों से लगी आग सोमवार को मुंबई हावड़ा रेलमार्ग के बांसा पहाड़ रेलवे लाइन तक पहुंच गई। हवा के बहाव के साथ तेज गति से बढ़ रहीं लपटों को देखकर रेलवे अफसरों में हड़कंप मच गया। आनन फानन बांद्रा से सहरसा जा रही सुपर फास्ट ट्रेन और तीन मालगाड़ियों को रोका गया।
विज्ञापन
इससे लगभग दो घंटे तक यात्री भीषण गर्मी में ट्रेन के भीतर बिलबिलाते रहे। पाठा क्षेत्र के नागर, बासा पहाड़, सीमा से सटे मध्यप्रदेश के धारकुंड़ी के जंगलों में बीते कई दिनों से आग धधक रही है। जिला प्रशासन के आग पर नियंत्रण के तमाम दावे गलत सबित हुए।
प्रयागराज से बाया सतना की ओर जाने वाले बांसा पहाड़ व बारामाफी रेलवे स्टेशन के बीच की रेल लाइन किनारे आग लगी रही। मानिकपुर जंक्शन नजदीक होने से यहां से रेलकर्मियों की टीम पहुंची। उधर, सतना से भी टीम आई। चित्रकूट के वन और रेलकर्मियों ने आग को रोकने के प्रयास शुरू किए।
विज्ञापन
इधर, बांद्रा-सहरसा एक्सप्रेस (22913) को बांसा पहाड़ से गुजरने से पहले बारामाफी स्टेशन पर रोका गया। दोपहर एक बजकर 25 मिनट से रूकी ट्रेन लगभग दो घंटे तक प्रभावित रही। लंबी रूट की इस ट्रेन को भीषण गर्मी में जिस स्टेशन के पास रोका गया, वहां पेयजल के भी पर्याप्त इंतजाम नहीं थे।
इसी तरह प्रयागराज, मानिकपुर व सतना रूट से आने वाली तीन मालगाडियों को बांसा पहाड़ रेलवे स्टेशन के पहले रोका गया। करीब साढ़े तीन बजे रेल यातायात बहाल हो सका। बांसा पहाड़ रेलवे स्टेशन के स्टेशन मास्टर विक्रम सिंह ने बताया कि आग से रेलवे को किसी तरह का नुकसान नहीं है।
पेड़, पौधे, झाड़ झंखाड़ हो रहे नष्ट, जंगली जीवों पर भी संकट
पाठा क्षेत्र के नागर, बासा पहाड़, सीमा से सटे मध्यप्रदेश के धारकुंड़ी के जंगलों में बीते कई दिनों से आग धधक रही है। यहां के पेड़, पौधे, झाड़ झंखाड़ धीरे धीरे नष्ट होते जा रहे हैं। दूर दूर तक आग की लपटें दिखाई दे रही हैं। वन विभाग की टीम इस आग पर अभी तक काबू नहीं पा सकी है। हवा चलने से आग की लपटें लगातार आगे बढ़ती जा रही हैं। आग से प्रभावित जंगल बहुत ही घने हैं। इनके आसपास भी कई जंगल हैं। आग पर समय रहते काबू नहीं पाया गया तो अन्य जंगल भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। इन जंगलों के पास से बरदहा नदी भी बहती है। इस वजह से जंगली जीवों का इसके आसपास डेरा रहता है। वे भी आग लगने के बाद इधर उधर भागने लगे हैं। कई के जलने की भी आशंका जताई जा रही है।
खेत खलिहानों में भी लगी आग
खेतों व खलिहानों में भी इस समय आग लगी हुई है। मऊ के ग्राम जोरवारा के पास गेहूं के खेत में बिजली के खंभे से निकली चिंगारी से आग लग गई। इसी तरह मऊ के ही गांव खंडेहा मौजा अर्जुनपुर रोड अहिरन के डेरा में खलिहान में रखी तीन बीघा की फसल जल गई।