कोरोना काल में माता-पिता या फिर कमाने वाले शख्स को खोने वाले बच्चों के खाते में गुरुवार को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत चार हजार रुपये प्रति माह के हिसाब से 12 हजार रुपये भेज दिए गए। जिले में फिलहाल 28 बच्चों को इस योजना का लाभ मिला है। हालांकि कुल 57 बेसहारा बच्चों के लिए मदद राशि स्वीकृत हो चुकी है। इनके खाते में भी इसी सप्ताह पैसा आ जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में योजना की शुरुआत की। यह कार्यक्रम प्रदेश के सभी जिलों में प्रसारित किया गया। इसी दौरान जिलों में योजना के पात्र बच्चों के खातों में सरकार की ओर से घोषित सहायता राशि भेजी गई। कलक्ट्रेट सभागार में उन्हें इसका प्रमाणपत्र मिला। यहां आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता उच्च शिक्षा एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री नीलिमा कटियार ने की।
उन्होंने बताया कि कोरोना के दौरान निराश्रित हुए बच्चों को 18 वर्ष की आयु तक प्रदेश सरकार प्रतिमाह चार हजार रुपये देकर उनके पालन-पोषण में मदद करेगी। पहले चरण में चार हजार बच्चों के खातों में सहायता राशि पहुंची है। इस मौके पर विधायक सुरेंद्र मैथानी, भगवती प्रसाद सागर, राज्य महिला आयोग की सदस्य पूनम कपूर, रंजना शुक्ला, जिलाधिकारी आलोक तिवारी, नगर आयुक्त अक्षय त्रिपाठी, सीडीओ डॉ. महेंद्र कुमार, एडीएम सिटी अतुल कुमार, डीसीपी साउथ रवीना त्यागी, एसपी आउटर अष्टभुजा प्रसाद, उप निदेशक महिला कल्याण श्रुति शुक्ला, जिला प्रोबेशन अधिकारी (डीपीओ) अभय कुमार मौजूद रहे।
वर्तमान में ये है स्थिति
जिला प्रोबेशन कार्यालय में 179 बेसहारा बच्चों के आवेदन आए हैं। इनमें से 117 का सत्यापन हो गया है। 55 बच्चों के लिए मदद राशि स्वीकृत करा ली गई है। 28 बच्चों के खातों में पैसा पहुंच चुका है। मदद राशि स्वीकृत होने वाले 55 बच्चों में सात पूरी तरह से अनाथ हैं। यानी इनके माता-पिता दोनों की मृत्यु हो चुकी है। 48 बच्चों के माता या पिता में से एक की मृत्यु हुई है। 62 बच्चों की फाइलें जांच के लिए सीएमओ कार्यालय में अटकी हैं। योजना में पात्र मिले कुल 102 में से 38 बच्चों के लिए मदद धनराशि को मंजूरी मिल गई है। डीपीओ ने बताया कि सीएमओ ऑफिस से जैसे-जैसे फाइलें आती रहेंगी, उन्हें मदद राशि की मंजूरी के लिए आगे बढ़ाया जाएगा।