टीम के सदस्य रमेश तूफानी, केके राज व किशन लाल को परिजनों ने बताया कि हमले की वजह रंजिश रही। मृतक की पत्नी ने आशा देवी ने बताया कि कर्ज लेकर घायलों का इलाज करवा रही हैं। आरोप लगाया कि आरोपियों के रिश्तेदार गांव छोड़ने की धमकी दे रहे हैं।
चौबेपुर के पनऊपुरवा गांव में हुए खूनी संघर्ष के मामले में मंगलवार को एससीएसटी आयोग की तीन सदस्यीय जांच टीम गांव पहुंची। पीड़ित परिजनों से मुलाकात कर घटना के बारे में जानकारी ली। पीड़ित परिजनों ने कहा कि आरोपियों ने पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर साजिश रची और घर पर हमला कर पिता की हत्या कर दी।
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पांच लोग गंभीर रूप से घायल हुए। आरोप लगाया कि अभी भी पुलिस आरोपियों का साथ दे रही है। नामजद आरोपी पुलिसकर्मी समेत कई आरोपी फरार हैं। केवल दो आरोपी जेल गए हैं। गांव में 25 अक्तूबर की रात श्रीकृष्ण त्रिवेदी, उसके बेटों व अन्य ने मिलकर पड़ोसी आनंद कुमार कुरील के घर हमला कर दिया था।
हमले में आनंद की हत्या कर दी गई थी। पत्नी, दो बहू, भाई व एक पड़ोसी घायल हुआ था। आनंद की बहू संदीपा ने श्रीकृष्ण, उनके बेटे, ग्राम प्रधान मनीष दीक्षित, उनके पिता, दरोगा गोपीकृष्ण, दरोगा शेर बहादुर समेत कुल 14 पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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मंगलवार को एससीएसटी आयोग की टीम गांव पहुंची। टीम के सदस्य रमेश तूफानी, केके राज व किशन लाल को परिजनों ने बताया कि हमले की वजह रंजिश रही। मृतक की पत्नी ने आशा देवी ने बताया कि कर्ज लेकर घायलों का इलाज करवा रही हैं।
आरोप लगाया कि आरोपियों के रिश्तेदार गांव छोड़ने की धमकी दे रहे हैं। वहीं आरोपी सुधीर की मां ने घटना की जानकारी से ही इनकार कर दिया। आनंद के पारिवारिक भतीजे राजन कुरील ने मृतक के परिजनों पर आरोप लगाए। उसने बताया कि षड्यंत्र के तहत ग्राम प्रधान व उसके पिता को फंसाया जा रहा है। टीम ने राजन के बयान भी दर्ज किए हैं। उधर ग्राम प्रधान के परिजनों ने भी अपनों को बेकसूर बताया।
ग्राम प्रधान को बताया सूत्रधार
परिजनों ने बताया कि ग्राम प्रधान मनीष व उसके पिता रामकुमार दीक्षित घटना के सूत्रधार हैं। आनंद कुमार उनके विपक्षी का चुनाव में समर्थन कर रहे थे। इसलिए मनीष उनसे खुन्नस रखने लगे थे। इसके पहले श्रीकृष्ण के बेटों पर दर्ज कराए गए केस को खत्म करने का दबाव भी ग्राम प्रधान बनाता था।
प्रधान के पक्ष में आए ग्रामीण बोले, नहीं मनाएंगे दिवाली
ग्राम प्रधान मनीष दीक्षित व उसके पिता के पक्ष में सैकड़ों ग्रामीण आ गए हैं। उनका कहना है कि दोनों को गलत फंसाया गया है। इसके विरोध में वे दिवाली नहीं मनाएंगे। आयोग के सामने भी एक शख्स आया। उसने कहा कि वह आनंद कुरील के परिवार का है। इसमें मनीष की कोई गलती नहीं है।
सदस्यों ने कहा अगर तुम आनंद के परिवार के हो तो बाल क्यों नहीं बनवाए। यह सुनकर वह चला गया। उधर मंगलवार को एसडीएम बिल्हौर गुलाब चंद्र अग्रहरी ने पीड़ित परिवार को चार लाख 12 हजार 500 की सहायता राशि देने की बात कही। उन्होंने बताया कि दलित उत्पीड़न के मामले में शासन द्वारा 8,25,000 की राशि पीड़ित पक्ष को दी जाती है। रिपोर्ट दर्ज होने पर आधी रकम पीड़ित परिवार को दिवाली के पूर्व मिल जाएगी।