23 बैंकों की 6833 करोड़ रुपये की डिफाल्टर कंपनी श्री लक्ष्मी कॉटसिन के मालिक एमपी अग्रवाल के कार्यालयों में काकादेव स्थित एक कार्यालय ऐसा मिला है, जो उनके छोटे भाई का निवास स्थान है। उनका कारोबार से कोई लेना-देना नहीं है।
अब सीबीआई इस बिंदु पर जांच कर रही है कि आखिर उनके निवास स्थान को कार्यालय क्यों दिखाया गया। वहीं सीबीआई ने एमपी अग्रवाल और उनके परिवार के लोगों के विदेश टूरों की भी जांच पड़ताल शुरू कर दी है। यूको बैंक हांगकांग और सिंगापुर शाखा से 54 करोड़ लोन लेने की वजहों की भी तलाश की जा रही है।
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के डीजीएम राजीव खुराना ने एक जून 2021 को सीबीआई में शिकायत दर्ज कराई थी। सीबीआई ने चार अगस्त को श्री लक्ष्मी कॉटसिन के खिलाफ आईपीसी की धारा 120 बी, 406, 420, 468, 471, 477ए में मामला दर्ज किया था।
इसके बाद सात अगस्त को अलग-अलग टीमों ने कंपनी के मालिक एमपी अग्रवाल के निवास और कृष्णापुरम स्थित कंपनी के मुख्यालय के अलावा, आवास विकास, काकादेव, कल्याणपुर स्थित कार्यालय व कर्मचारियों के घरों, फतेहपुर (मलवां), नोएडा और रुड़की स्थित फैक्ट्रियों और कार्यालयों में छापा मारा था।
सूत्रों के अनुसार कंपनी के एमडी और निदेशकों ने सात पतों में कृष्णापुरम स्थित मुख्यालय दर्ज कराया है। टीम ने काकादेव स्थित कार्यालय के पते पर छापा मारा था। जांच में पता चला कि इस पते पर कंपनी के मालिक एमपी अग्रवाल के छोटे भाई रहते हैं और इनका कारोबार से कोई जुड़ाव नहीं है। सूत्रों के अनुसार सीबीआई जल्द ही कंपनी के एमडी और निदेशकों को समन जारी करके पूछताछ करके बयान दर्ज कर सकती है।