फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP election: शुरू से ही 'स्वामी' के समर्थक रहे हैं बृजेश, सपा में हो सकते हैं शामिल, इस्तीफे के बाद तेज हुई सियासी हलचल

Wed, 12 Jan 2022 05:40 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा

सार


मौर्य के दलबदल और भाजपा विधायक के इस्तीफे से बांदा में गरमाई सियासत
भाजपा पर दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों को तवज्जो न मिलने का आरोप
विज्ञापन
स्वामी प्रसाद मौर्य के समर्थन में इस्तीफा देने वाले विधायक बृजेश प्रजापति - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बांदा जिले से स्वामी प्रसाद मौर्य के मंत्रिमंडल व भाजपा से इस्तीफा देने के बाद से बांदा में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। मौर्य के समर्थक और तिंदवारी क्षेत्र से भाजपा विधायक बृजेश कुमार प्रजापति ने भी उनके समर्थन में भाजपा से इस्तीफा दे दिया है। माना जा रहा है कि दोनों ही सपा का परचम थामेंगे।
विज्ञापन

 
निवर्तमान विधायक बृजेश शुरू से ही स्वामी प्रसाद के समर्थक माने जाते रहे हैं। यह चर्चा थी कि तिंदवारी क्षेत्र से बीजेपी का टिकट भी उन्हें मौर्य की हिस्सेदारी वाली सीटों में ही मिला था। अब यह बात और साफ हो गई है। मंगलवार को मौर्य की ओर से इस्तीफा देने के फौरन बाद बृजेश ने भी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को अपने लेटर पैड पर त्यागपत्र भेज दिया।

इस इस्तीफे की भाषा भी काफी हद तक स्वामी प्रसाद मौर्य के इस्तीफे वाले पत्र से मिलती-जुलती है। इस्तीफे में उन्होंने कहा है कि पांच वर्षों के दौरान दलित, पिछड़ों, अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं व जनप्रतिनिधियों को भाजपा सरकार ने कोई तवज्जो नहीं दी। न ही उन्हें उचित सम्मान दिया गया।
विज्ञापन


इसके अलावा बृजेश ने बेरोजगार नौजवानों और छोटे व मध्यम व्यापारियों की घोर उपेक्षा का भी आरोप लगाया। कहा कि प्रदेश सरकार के इस कूटनीति परक रवैये से ही वह भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य शोषित पीड़ितों की आवाज हैं। उनके नेता हैं। वे उन्हीं के साथ हैं। इस्तीफे की प्रति भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को भी भेजी है।


तल्ख बयानी और कार्य प्रणाली से सुर्खियों में रहे 
बांदा के तिंदवारी क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर विधायक चुने गए बृजेश अपनी तल्ख बयानी और हावभाव से शुरू से ही सुर्खियों में रहे हैं। भाजपा नेताओं से उनकी बहुत अच्छी नहीं पटी। अक्तूबर 2014 में बृजेश ने अपनी ही सरकार पर सवाल उठाए थे। आरोप लगाया था कि इस सरकार में भ्रष्ट अफसरों का सिंडीकेट हावी है। ब्यूरोक्रेसी सरकार पर हावी होती है तो लोकतंत्र खतरे में होता है।

बृजेश विधायक रहते हुए कई खनन माफिया और बांदा में ठेका हथियाने वाली बड़ी कंपनियों के भी विरोधी रहे। अवैध खनन और ओवरलोडिंग पर देर रात खुद चेकिंग करने पहुंच गए। नौबत ये आ गई कि तत्कालीन खनिज अधिकारी शैलेंद्र सिंह ने विधायक और उनके खास लोगों पर मारपीट की एफआईआर दर्ज करा दी। इसके बाद विधायक का सुरक्षाकर्मी बदल दिया गया।

इससे नाराज बृजेश ने अपनी सुरक्षा वापस कर दी। उन्होंने यह भी कहा था कि ई-रिक्शा और बैलगाड़ियों पर अवैध खनन की बड़ी कार्रवाई दिखाई जा रही है, जबकि माफिया और अफसरों का सिंडीकेट अवैध खनन करा रहा है, उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही।

विधायक ने खनिज अधिकारी पर रिश्तेदारों को खदानों में पट्टे और खनिज विभाग में नौकरी दिलाने के आरोप लगाए थे। अगस्त 2020 में लखनऊ में उन पर हुए हमले की घटना में भी वह सुर्खियों में रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें