कानपुर देहात। भोगनीपुर विधानसभा में टिकट कटने से उठे विरोध के स्वर तो अब थम गए हैं लेकिन प्रत्याशियों को अपने ही दल के भितरघातियों से निपटना काफी मुश्किल होगा। खासतौर पर भाजपा व सपा में खींचतान ज्यादा है। भाजपा ने वर्तमान विधायक का टिकट काटकर उनकी ही बिरादरी के पूर्व सांसद को मैदान में उतार दिया है। वहीं, सपा से टिकट मांग रहे पूर्व जिलाध्यक्ष समेत कई अन्य दावेदार मायूस हो गए हैं। इसका खामियाजा प्रत्याशियों को भुगतना पड़ सकता है। हालांकि बसपा में कोई खास विरोध नहीं है।
बसपा ने मुस्लिम प्रत्याशी जुनेद खां को मैदान में उतारा है। इस सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या काफी अधिक है। मतदान में मुस्लिम मतों का अगर सपा व बसपा के बीच बंटवारा हो गया तो निश्चित तौर पर दोनों दल के प्रत्याशी कमजोर होंगे। अगर किसी एक दल को वोट चला गया तो उसकी स्थिति काफी मजबूत हो सकती है।
बता दें कि पुनर्गठन के बाद 2007 में भोगनीपुर विधानसभा सीट बनी। 2007 मेें बसपा के रघुनाथ प्रसाद ने सपा की अरुणा कोरी को हराकर जीत हासिल की। परिसीमन के दौरान क्षेत्र का काफी बदलाव हुआ तो जातीय समीकरण बदल गए। सरवनखेड़ा ब्लॉक का बड़ा क्षेत्र इस विधानसभा में जुड़ गया। 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा के योगेंद्र पाल सिंह ने बसपा के धर्मपाल भदौरिया को हराकर जीत हासिल की। वहीं, 2017 के चुनाव में भाजपा के विनोद कटियार ने बसपा के धर्मपाल भदौरिया को हराया। इस बार पार्टी ने विनोद कटियार की जगह पूर्व सांसद राकेश सचान को मैदान में उतारा है। वह टिकट मिलने के कुछ ही दिन पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। इससे विधायक समर्थकों ने विरोध किया था। साथ ही पार्टी कार्यालय में हंगामा भी किया था। हालांकि बाद में मामला शांत हो गया। अब विधायक भी प्रत्याशी के साथ चुनाव मैदान में है। इसी तरह सपा ने इसी सीट से विधायक रहे योगेंद्र पाल सिंह के बेटे नरेंद्र पाल सिंह मनु को मैदान में उतारा है। कांग्रेस से गोविंद कुमार मैदान में हैं। वह निषाद बिरादरी से हैं। उनका मूल आधार बिरादरी के साथ पार्टी का वोट बैंक है। निषाद बिरादरी की साध्वी निरंजन ज्योति भाजपा सरकार में केंद्रीय मंत्री हैं। क्षेत्र के बड़ी संख्या में निषाद उनसे जुड़े रहते हैं। निषाद वोट कांग्रेस को कितना मिलता है। ये तो समय तय करेगा।
टिकट बदलो के लगे थे नारे
भोगनीपुर सीट पर सपा से पूर्व जिलाध्यक्ष समेत कई कद्दावर दावेदार सक्रिय थे। टिकट न मिलने पर उनके समर्थकों ने लखनऊ जाकर टिकट बदलो के नारे लगाए थे। हालांकि बात नहीं बनी। इसी तरह से भाजपा में कभी सपा के कद्दावर नेता रहे फतेहपुर से सांसद रहे राकेश सचान पर भरोसा जताया है। राकेश सचान इस समय कांग्रेस में थे। दल बदलकर आते ही टिकट मिलने से कार्यकर्ताओं में नाराजगी दिख रही थी लेकिन नेता डैमेज कंट्रोल में लगे हैं। साथ ही विधायक को भी उनके समर्थन में लगाया है। अंदर खाने दोनों दलों के नेताओं का काफी असंतोष है।
कुल मतदाता-329258
पुरुष मतदाता-170971
महिला मतदाता-158287
जातीय आंकड़े
ब्राह्मण-26000
क्षत्रिय-25500
कुर्मी-26000
यादव-57000
अनुसूचित जाति-40000
पासी,कोरी-40000
निषाद-19000
मुसलमान-37500
अन्य-30000
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क्षेत्र के बड़े मुद्दे-
- बुंदेलखंड की सुविधाओं की मांग, 1984 से निर्माणाधीन अमराहट पंप कैनाल के द्वितीय चरण का अधूरा कार्य, रोजगार, सड़क व नालियों का अभाव, आवारा पशुओं की समस्या
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