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बेहमई कांड: 20 लोगों की हत्या के चश्मदीद गवाह जंटर सिंह की मौत, कई दिनों से चल रहे थे बीमार

Thu, 21 Oct 2021 03:04 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर देहात

सार

वादी जंटर सिंह के निधन के बाद बेहमई गांव में शोक की लहर है। बेहमई कांड के मुकदमे में अधिवक्ता का कहना है कि मुख्य गवाह के बयान व गवाही अदालत में काफी पहले हो चुकी है, ऐसे में मुकदमे की कार्यवाही में कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
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बेहमई कांड के वादी की मौत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बेहमई कांड के वादी जंटर सिंह की बीमारी से गुरुवार को मौत हो गई। फूलन देवी समेत 36 डकैतों पर रिपोर्ट दर्ज कराने वाले राजाराम सिंह की मौत के बाद जंटर सिंह वादी के रूप में पैरवी कर रहे थे।

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जंटर कई दिनों से बीमार होने की वजह से वह पीजीआई लखनऊ में भर्ती थे। जहां पर गुरुवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। बेहमई कांड में बीते चालीस साल बाद फैसले का इंतजार कर रहे जंटर ने वादी राजाराम की मौत के बाद मुकदमे की अकेले पैरवी कर रहे थे।

उनके निधन के बाद बेहमई गांव में शोक की लहर है। बेहमई कांड के मुकदमे में अधिवक्ता का कहना है कि मुख्य गवाह के बयान व गवाही अदालत में काफी पहले हो चुकी है, ऐसे में मुकदमे की कार्यवाही में कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
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14 फरवरी 1981 को बेहमई गांव में फूलन देवी ने गोली मारकर 20 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। छह लोग घायल हुए थे। फूलन ने गांव में अपने डकैत साथियों के साथ मिलकर धावा बोला था। इसके बाद गांव के बाहर की तरफ बने कुएं के पास 26 लोगों को लाइन से खड़ा कर गोलियां चलाई थीं।

इस घटना की गूंज विदेशों तक पहुंची थी। फूलन देवी पर बैडिंट क्वीन फिल्म भी बनाई गई। इस घटना के वादी राजाराम सिंह बने थे। उनकी पिछले वर्ष मौत हो गई थी। इसके बाद गांव के लोगों ने वादी के रुप में जंटर सिंह को पैरवी करने के लिए लगाया।

जंटर सिंह बतौर वादी कोर्ट में पैरवी कर रहे थे। इस हत्याकांड में गोली लगने से जंटर भी घायल हुए थे। वह डकैतों से बचने के लिए लाशों के बीच मृतक की तरह पड़े रहे। ताकि डकैत कोई हलचल देख फिर से गोली न दाग दे। न्याय की आस में जंटर सिंह भी चल बसे।

पिछले कई महीनों से वह बीमार चल रहे थे। लखनऊ पीजीआई में उनकी बुधवार रात मौत हो गई। इसकी जानकारी पर गुरुवार को उनके गांव में बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए। गांव के बाहर यमुना नदी किनारे उनका अंतिम संस्कार किया गया।

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