कानपुर। मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती...कवि सोहन लाल द्विवेदी की यह पंक्तियां कारवालोनगर निवासी आईपीएस दिव्यांक गुप्ता पर सटीक बैठती हैं। तीसरे प्रयास में आईपीएस बनने वाले दिव्यांक ने पांचवें प्रयास में यूपीएससी परीक्षा में 21वीं रैंक पाई है। ऐसे में इस बार उनका आईएएस बनने का सपना पूरा होगा। मुख्य परीक्षा पास कर साक्षात्कार तक पहुंचे दिव्यांक ने ज्यूरी के सदस्यों के सभी सवालों का आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया। वर्तमान में वह राष्ट्रीय पुलिस अकादमी हैदराबाद में प्रशिक्षण ले रहे हैं।
कारवालोनगर राम लीला मैदान के पास रहने वाले किराना व्यापारी दिनेश चंद्र गुप्ता और शशि गुप्ता के दो बेटे हैं। बड़े बेटे सुधीर टाटा मोटर्स में सेल्स मैनेजर हैं। सुधीर ने बताया कि छोटे भाई दिव्यांक का सपना आईएएस बनने का था। वह बचपन से ही पढ़ने में काफी तेज रहे। उन्होंने श्री सनातन धर्म एजुकेशन सेंटर से 2014 में हाईस्कूल की परीक्षा पास की थी। उस समय वह प्रदेश के मेधावियों की मेरिट सूची में शामिल थे। 2016 में इंटरमीडिएट की परीक्षा 90 फीसदी से ज्यादा अंकों के साथ पास की थी।
सुधीर के अनुसार दिव्यांक ने इंटरमीडिएट की तैयारी के साथ ही उसी साल जेईई की परीक्षा दी थी। पहले ही प्रयास में वह शानदार अंकों के साथ पास हुए और रैंक के आधार पर कानपुर आईआईटी में दाखिला मिल गया। यहां से 2020 में केमिकल इंजीनियरिंग पूरी की। इसके बाद अपना सपना पूरा करने के लिए यूपीएससी की परीक्षा में बैठे। तीसरे प्रयास में 357वीं रैंक पाकर आईपीएस बने। वर्तमान में वह राष्ट्रीय पुलिस अकादमी हैदराबाद में प्रशिक्षण ले रहे हैं। हालांकि आईएएस बनने के लिए उन्होंने दो और प्रयास किए। इसमें उन्हें इस बार 21वीं रैंक मिली।
गणित दिव्यांक का पसंदीदा विषय है, जबकि खेलों में वह बास्केटबॉल के शौकीन हैं। दिव्यांक ने बताया कि उन्होंने पढ़ने का कोई समय तय नहीं किया था। बस जब भी समय मिला पढ़ाई की। उन्हें किताबें पढ़ने का शौक है। बोले, पुराने प्रश्नपत्रों को हल किया तो सवाल पूछे जाने का तरीका समझ में आया। परीक्षा में सफल होने के लिए यह जरूरी है कि हमें पता होना चाहिए कि क्या पढ़ना और कितना पढ़ना है।