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सिख विरोधी दंगा: 135 शपथ पत्रों से बेनकाब हुए दंगाई, मृत्यु प्रमाण पत्रों से हुई हत्या की पुष्टि 

Sun, 19 Jun 2022 08:45 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

एसआईटी ने रंगनाथ मिश्र आयोग से 135 शपथ पत्र जुटाए थे। इन शपथ पत्रों में केस से जुड़े एक-एक आरोपी के नाम लिखे थे, जिससे एसआईटी को बहुत सहूलियत हुई। 
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सिख विरोधी दंगा - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कानपुर में सिख विरोधी दंगों के आरोपियों को बेनकाब करने में रंगनाथ मिश्र आयोग से मदद मिली। आयोग से मिले दंगों से संबंधित 135 शपथ पत्रों में एक एक दंगाइयों का नाम लिखा हुआ था। एसआईटी ने इसी आधार पर दंगाइयों का सत्यापन किया और उन पर शिकंजा कसना शुरू किया। इसके अलावा दंगे में मारे गए सिखों की हत्या की पुष्टि के लिए एसआईटी ने मृतकों के मृत्यु प्रमाण पत्र जुटाए। इन दोनों तथ्यों से विवेचना मजबूत हुई है। 

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शासन ने पांच फरवरी 2019 को एसआईटी का गठन किया था। पहले से तय था कि दंगों के दौरान दर्ज किए गए हत्या के केसों की विवेचना की जाएगी। केसों की एफआईआर जुटाना, वादी व गवाहों का पता लगाने के साथ आरोपियों के बारे में जानकारी जुटाना सबसे बड़ी चुनौती थी। कोर्ट, थाने और दंगा पीड़ित कमेटी आदि के जरिये केसों से संबंधित तमाम जानकारी एसआईटी ने जुटाई लेकिन वह नाकाफी थी। 

इसके बाद एसआईटी ने गृह मंत्रालय से अनुमति लेकर रंगनाथ मिश्र आयोग से दंगे संबंधी दस्तावेेज जुटाए। आयोग ने ही उस वक्त जांच की थी। आयोग से कुल 657 शपथ पत्र मिले, जिनमें से 135 शपथ पत्र एसआईटी के काम के थे। इन शपथ पत्रों को विवेचना में शािमल किया और दंगाइयों को बेपर्दा किया।

वादी और पीड़ितों ने दिए थे शपथ पत्र
आयोग ने जब जांच की थी तब 1984 में ये शपथ पत्र वादी, पीड़ितों और गवाहों ने आयोग को सौंपे थे। एसआईटी के मुताबिक शपथ पत्र में पूरा घटनाक्रम, आरोपियों के नाम, घटना स्थल समेत अन्य पूरे तथ्य लिखे हुए हैं। एसआईटी ने शपथ पत्र देने वाले 13 वादी/गवाहों के कोर्ट में बयान भी कराए। इन्होंने एक-एक बात कोर्ट में बताई। दंगाइयों के खिलाफ यह गवाही सजा तक पहुंचा सकती है। 

पीएम रिपोर्ट नहीं मिले, तब भी केस पर फर्क नहीं 
मृतकों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट (पीएम रिपोर्ट) जुटाने की एसआईटी ने काफी जद्दोजहद की थी, लेकिन कागजात नहीं मिल सके थे। तब डीएम ऑफिस से मृतकों के मृत्यु प्रमाण पत्र जुटाए, जिसमें मौत का कारण लिखा हुआ था। इससे इस बात की पुष्टि हो गई कि मृतकों की हत्या की गई थी। 
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विवेचना में रंगनाथ मिश्र आयोग से मिले दस्तावेज बेहद अहम साबित हुए हैं। आरोपियों के बारे में पूरी जानकारी उससे मिली। गवाह व वादी की भी तस्दीक आसानी से की गई। वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट न मिलने से दिक्कत नहीं हुई, क्योंकि मृत्यु प्रमाण पत्र सभी के मिल गए। केसों में सुबूत बेहद पुख्ता हैं।  -बालेंदु भूषण सिंह, डीआईजी एसआईटी

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