कानपुर में सिख विरोधी दंगों की जांच कर रही एसआईटी को एक केस में पुख्ता साक्ष्य हाथ लगे हैं। दबौली स्थित घटना स्थल में 36 साल बाद मानव रक्त मिलने के साथ शव जलाए जाने के सुबूत फोरेंसिक ने जुटाए हैं। दंगों के बाद से घटना स्थल बंद पड़ा था।
एसआईटी जिन 11 केसों की जांच कर रही है, उनमें से ये तीसरा ऐसा केस है जिसमें मानव रक्त, आगजनी आदि के सुबूत मिले हैं। इस केस में करीब एक दर्जन आरोपियों के नाम सामने आए हैं। एसआईटी एसएसपी बालेंदु भूषण सिंह ने बताया कि एक नवंबर 1984 को दबौली के एल ब्लॉक स्थित मकान नंबर 28 में दंगाईयों ने हमला कर दिया था।