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सिख विरोधी दंगा: 36 साल बाद मिले मानव रक्त के धब्बे और शव फूंकने के सुबूत, दहल गया जांच टीम का दिल

Thu, 12 Aug 2021 06:26 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

एसआईटी एसएसपी बालेंदु भूषण सिंह ने बताया कि एक नवंबर 1984 को दबौली के एल ब्लॉक स्थित मकान नंबर 28 में दंगाईयों ने हमला कर दिया था।
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सिख दंगा (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर में सिख विरोधी दंगों की जांच कर रही एसआईटी को एक केस में पुख्ता साक्ष्य हाथ लगे हैं। दबौली स्थित घटना स्थल में 36 साल बाद मानव रक्त मिलने के साथ शव जलाए जाने के सुबूत फोरेंसिक ने जुटाए हैं। दंगों के बाद से घटना स्थल बंद पड़ा था।
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एसआईटी जिन 11 केसों की जांच कर रही है, उनमें से ये तीसरा ऐसा केस है जिसमें मानव रक्त, आगजनी आदि के सुबूत मिले हैं। इस केस में करीब एक दर्जन आरोपियों के नाम सामने आए हैं। एसआईटी एसएसपी बालेंदु भूषण सिंह ने बताया कि एक नवंबर 1984 को दबौली के एल ब्लॉक स्थित मकान नंबर 28 में दंगाईयों ने हमला कर दिया था।
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कारोबारी तेज प्रताप सिंह व उनके बेटे सत्यवीर सिंह की हत्या कर उनके शव जला दिये थे। मामले में गोविंद नगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी लेकिन पुलिस ने इसमें फाइनल रिपोर्ट लगा केस बंद कर दिया था। अब जब एसआईटी ने जांच शुरू की तो एक के बाद एक साक्ष्य सामने आते गए।

एसएसपी ने बताया कि मंगलवार को को घटना स्थल पर फोरेंसिक टीम पहुंची तो वहां पर मानव रक्त के धब्बे मिले। जले दरवाजे और दीवारों पर भी आगजनी के निशान पाए गए। जांच टीम ने इन साक्ष्यों का संकलन कर लिया है। 

ऐसे खुली थी इस केस की फाइल 
एसएसपी ने बताया कि इस केस से संबंधित कुछ भी दस्तावेज नहीं मिले थे। इसलिए इसकी जांच पहले नहीं की जा रही थी। अन्य केसों की जांच के सिलसिले में जब दरोगा सुनील अवस्थी व कमलेश कुमार पंजाब गए तो इस दौरान सत्यवीर सिंह के बेटे चरणजीत सिंह से मुलाकात हुई। उन्होंने पूरी वारदात बताई। एफआईआर मुहैया कराई। तब इस केस को भी जांच में शामिल कर लिया गया था।
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