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अमर उजाला शिक्षा अभियान: छोटे बच्चों में पढ़ाई के प्रति गंभीरता लाना बड़ी चुनौती, दो साल चली ऑनलाइन क्लास

Sat, 26 Mar 2022 03:54 PM IST
शिखा पांडेय शैली भल्ला, अमर उजाला, कानपुर

सार

कोरोना से भयमुक्त हो चुके अभिभावक भी बच्चों को स्कूल भेजने को तैयार हैं। हालांकि छात्रों का तापमान, ऑक्सीजन लेवल की जांच के साथ ही जूतों को सैनिटाइज करना, मास्क लगाना भी जरूरी होगा।
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स्कूल खुलने के बाद कक्षा में मौजूद बच्चे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोरोना महामारी के बाद खुले स्कूलों में कई बदलाव हुए हैं। बेपटरी हुई शिक्षण व्यवस्था, खेलकूद, प्रैक्टिकल, सांस्कृतिक कार्यक्रम अब नए सत्र फिर से पटरी पर आएंगे। अप्रैल में सभी बोर्ड के स्कूलों का नया सत्र शुरू हो जाएगा। इस नए सत्र में संचालकों को दो साल के गैप को भी पूरा करना है।
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कारण, दो साल घर बैठे की गई पढ़ाई ने छात्रों को आलसी बना दिया है। खासतौर पर छोटी कक्षाओं के बच्चे तो कुछ भी नहीं सीख पाए हैं। दो साल बाद स्कूल खुलने जा रहे तो दाखिले भी खूब हुए हैं। लगभग सभी स्कूलों में दाखिलों की प्रक्रिया पूरी हो गई है।

कोरोना से भयमुक्त हो चुके अभिभावक भी बच्चों को स्कूल भेजने को तैयार हैं। हालांकि छात्रों का तापमान, ऑक्सीजन लेवल की जांच के साथ ही जूतों को सैनिटाइज करना, मास्क लगाना भी जरूरी होगा। बता दें सीबीएसई और आईसीएसई स्कूलों में 10वीं और 12वीं की कक्षाएं अभी लग रही हैं। इनमें कोरोना गाइडलाइन का पूरा पालन किया जा रहा है।
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शीलिंग हाउस में चलेंगी कांसेप्ट क्लीयरिंग क्लासेज
शीलिंग हाउस में छोटे बच्चों के लिए कांसेप्ट क्लीयरिंग क्लासेज, सॉफ्ट स्किल्स डेवलपमेंट क्लासेज, राइटिंग इंप्रूवमेंट क्लासेज लगाई जाएंगी। इसके अलावा स्कूल में कोरोना के तहत मास्क की अनिवार्यता, रोजाना छात्रों का तापमान, ऑक्सीजन लेवल चेक किया जाएगा। स्कूल में प्रवेश से पहले सभी के जूतों को सैनिटाइज किया जाएगा। सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन करना होगा।

निश्चित रूप से कोरोना ने शिक्षण व्यवस्था को बुरी तरह से प्रभावित किया है। प्राइमरी और जूनियर बच्चों का काफी नुकसान हुआ है। बच्चे फोकस नहीं कर पा रहे हैं। राइटिंग स्किल्स पर भी फर्क पड़ा है। इसे पूरा करना बड़ी चुनौती है। ऑनलाइन पढ़ाई में छात्र एकेडमिक्स तो पढ़ सकते हैं, लेकिन एटीकेट्स, लैंग्वेज बोलना, मैनर्स सब स्कूल ही सिखा सकता है। अब इसके लिए शिक्षकों को दो गुनी मेहनत करनी पड़ेगी और इसके लिए स्कूल तैयार है। - वनिता मेहरोत्रा, प्रिंसिपल शीलिंग हाउस स्कूल

दोस्तों के साथ कम बैठने को मिल पाता है। स्कूल आने पर वो पहले वाली फीलिंग नहीं आ पाती, लेकिन समझती हूं कि स्कूल की व्यवस्था हम छात्रों की भलाई के लिए है।- यशी त्रिवेदी, 10वीं, शीलिंग हाउस स्कूल

स्कूल आने से पहले सैनिटाइजेेशन, सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क को अब जिंदगी का हिस्सा मान लिया है। हालांकि घर बैठकर पढ़ने और स्कूल की पढ़ाई में काफी अंतर है।- अवतरित त्रिपाठी, 10वीं, शीलिंग हाउस स्कूल

मंटोरा में बच्चों के साथ ही अभिभावकों की भी काउंसलिंग
मंटोरा पब्लिक स्कूल कल्याणपुर में भी हजारों की संख्या में छात्र पढ़ते हैं। कोरोना काल के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई के कारण बच्चों में लिखने की प्रवृत्ति बहुत कम हो गई है। उसमें सुधार किया जा रहा है। छात्र-छात्राओं को मास्क के बगैर प्रवेश नहीं दिया जाता है। स्कूल में आइसोलेशन वार्ड की भी व्यवस्था है। धीरे-धीरे बच्चों शिक्षकों, बाकी स्टाफ में दो साल पहले वाला आत्मविश्वास लौट रहा है। समय-समय पर बच्चों व उनके माता-पिता के लिए काउंसलिंग सेशन की भी व्यवस्था की गई है। आने वाले सत्र से छात्रों की लिखने की प्रवृत्ति पर फोकस किया जाएगा।

दो साल में पढ़ाई का तो काफी नुकसान हुआ है। ऑनलाइन पढ़ाई में छात्र उतना फोकस नहीं रहते थे। परिस्थितियां और माहौल भी अलग था। अब स्कूल खुल गए हैं। छात्रों के साथ मेहनत करने को स्कूल भी तैयार हैं। नए सत्र से अलग रणनीति बनाकर छात्रों के साथ पढ़ाई होगी।- डॉ. रितु बाजपेई, प्रिंसिपल मंटोरा पब्लिक स्कूल

पिछले दो साल से घर बैठे ऑनलाइन पढ़ाई से बहुत बोरियत होने लगी थी। जो मजा स्कूल में मित्रों के साथ बैठकर पढ़ने में है, वह घर बैठे नहीं है।- प्रथित,12वीं, मंटोरा पब्लिक स्कूल

अब दिन में कई बार हाथों को साफ करने की आदत बन चुकी है। यूनिफार्म के साथ मास्क भी शामिल हो चुका है।- भाग्या, 12वीं, मंटोरा पब्लिक स्कूल

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बोले अभिभावक

छात्रों के अलावा अभिभावक भी बच्चों का लेकर चिंतित थे। बच्चों के बोर्ड एग्जाम थे, जिससे परेशानी और बढ़ी। स्कूल खुले तो निश्चिंत हुए।- बबिता मिश्रा, गुमटी

ऑनलाइन पढ़ाई में बच्चों की मस्ती जारी थी। बच्चों का पढ़ाई पर फोकस नहीं था। गंभीरता नहीं थी, स्कूल खुलने के बाद सब पटरी पर आया।- दीपांशु सैनी, गोविंदनगर

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