वर्ष 1970 में पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) छोड़कर मेरठ के हस्तिनापुर में बसे 63 बंगाली हिंदू परिवार भविष्य में कानपुर के बाशिंदे होंगे। इन्हें कानपुर देहात के रसूलाबाद में बसाया जाएगा। यहां के भैंसाया, ताजपुर, तरसौली और पहाड़ीपुर गांवों में पहले से ही करीब 350 बंगाली परिवार करीब 50 वर्षों से रह रहे हैं।
हस्तिनापुर के बंगाली परिवारों ने सरकार से कानपुर या मेरठ में ही बसाने की अपील की थी। इसे सरकार ने स्वीकार कर लिया है। अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह की अगुवाई में शासन की एक टीम 20 नवंबर को यहां भूमि देखने आ सकती है। माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव से पूर्व पुनर्वासित करने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
राज्य सरकार ने बीते बुधवार को इन बंगाली हिंदू परिवारों के पुनर्वास का प्रस्ताव कैबिनेट से मंजूर कराया था। हस्तिनापुर में रह रहे विश्वजीत दास ने बताया कि बांग्लादेश विभाजन से पहले पूर्वी पाकिस्तान में हिंदू परिवारों पर अत्याचार हो रहे थे। बहुत से बंगाली हिंदू जान बचाकर भारत आए थे। उस दौर में सभी को रुद्रपुर कैंप में रखा गया था।