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कानपुर की ‘हवा’ और अफसरों का ‘रवैया’ दोनों खराब: वायु की गुणवत्ता मापने वाले 50 में से 17 उपकरण हैं निष्क्रिय

Sat, 13 Nov 2021 04:10 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

कानपुर में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण की निगरानी और इसकी रोकथाम में लापरवाही पर मंडलायुक्त ने स्मार्ट सिटी के सीईओ और नगर आयुक्त शिवशरणप्पा जीएन से नाराजगी जताई।
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कानपुर में प्रदूषण - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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प्रदूषण की वजह से कानपुर की हवा तो खराब है ही, ऊपर से इसकी रोकथाम के जिम्मेदार विभागों के अफसरों का रवैया और भी ज्यादा खराब है। लगातार बढ़ रहे वायु प्रदूषण पर संबंधित विभागों की ओर से कोई कदम न उठाए जाने पर मंडलायुक्त डॉ. राजशेखर ने इसे संज्ञान लिया तो यह बात सामने आई।
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वायु प्रदूषण की निगरानी और इसकी रोकथाम में लापरवाही पर मंडलायुक्त ने स्मार्ट सिटी के सीईओ और नगर आयुक्त शिवशरणप्पा जीएन से नाराजगी जताई। साथ ही क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी अनिल माथुर और टेक महिंद्रा कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी करने का आदेश दिया।

बढ़ते वायु प्रदूषण की रोकथाम न होते देख मंडलायुक्त ने शुक्रवार को जरीब चौकी और कोकाकोला चौराहे के पास स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत लगाए गए प्रदूषण मापक यंत्र देखे। इसके बाद स्मार्ट सिटी कार्यालय में बने इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर (आईसीसीसी) में प्रदूषण पर निगरानी रखने का तौरतरीका देखा।
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यहीं पर स्मार्ट सिटी के सीईओ और क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी को बुलाकर वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली की विस्तार से समीक्षा की। पता चला कि शहर के विभिन्न स्थानों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) जांचने के लिए लगाए गए उच्च क्षमता वाले सेंसर आधारित 50 उपकरणों में से 33 ही काम कर रहे हैं।

मेट्रो और सड़क निर्माण कार्यों की वजह से बाकी बंद हैं। यह बात भी सामने आई कि आईसीसीसी की संचालक कंपनी टेक महिंद्रा कई महीनों से प्रदूषण की नियमित रिपोर्ट तैयार नहीं कर रही है। इस पर मंडलायुक्त ने स्मार्ट सिटी के सीईओ से नाराजगी जताई। निर्देश दिया कि मेट्रो और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से बात करके शेष 17 सेंसरों को 15 दिनों में ठीक कराया जाए या बदला जाए। साथ ही टेक महिंद्रा के मैनेजर को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए। मंडलायुक्त ने सीईओ से 15 दिनों तक लगातार समीक्षा करने को कहा। अगली बैठक 15 दिन बाद तय की है।

15 दिन में सेंसर सिस्टम को मिले मान्यता
मंडलायुक्त ने क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी से पूछा कि स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत एक्यूआई मापने के लिए लगाए गए उपकरणों की रीडिंग आने के बाद उन्होंने क्या कार्यवाही की। इस पर उन्होंने बताया कि कुछ नहीं, क्योंकि सेंसर आधारित इस सिस्टम को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) मान्यता नहीं देता। इस पर मंडलायुक्त ने नाराजगी जताई। कहा कि ये बात पहले क्यों नहीं बताई गई? सुधारात्मक उपाय न अपनाने पर उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया। साथ ही निर्देश दिया कि 15 दिन में सीपीसीबी से इसे मान्यता दिलाएं।
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