फिटनेस जांच में ही पकड़ी जा सकती है खामी
आरटीओ के आरआई अजीत सिंह ने बताया कि व्यावसायिक वाहनों के इंजन, पहिये, व्हील बेस से लेकर पूरी बॉडी की जांच की जाती है। सड़क पर चलते चलते वाहनों में कुछ न कुछ दिक्कतें आ सकती हैं। कई बार मैकेनिक उसको ठीक कर देते हैं, लेकिन कुछ न कुछ तकनीकी दिक्कतें हो सकती हैं। उसकी खामी फिटनेस जांच में ही पकड़ी जा सकती है।
सभी व्यावसायिक वाहनों में ये लगा होना आवश्यक
स्लीपर और सवारी बसों में व्हील बेस के मुताबिक सीटों की जांच होती है। बैलेंसिंग, इमरजेंसी विंडो, इंजन में आवाज आदि को जांचा जाता है। सीएनजी वाले ऑटो-टेंपो की हर छह-छह महीने में पाइप की जांच होनी जरूरी है, जबकि तीन साल में सिलिंडर की सर्विसिंग होनी चाहिए। सभी व्यावसायिक वाहनों में ब्रेक, पहिये की स्थिति, ब्रेक की क्षमता, लाइट, रेट्रो रिफ्लेक्टो टेप लगा होना आवश्यक है।
पंजीकृत व्यावसायिक वाहनों की संख्या
वाहन संख्या
ट्रक व लोडर 39354
टेंपो-ऑटो 11422
बस 5313
मोटर कैब 4553
ट्रैक्टर 1350
मैक्सी कैब 1176
एंबुलेंस 541
(नोट : आंकड़े एक जुलाई 2024 के हैं )
स्कूली वैन में नहीं लगी होनी चाहिए एलपीजी-सीएनजी किट
परिवहन अधिकारियों के मुताबिक स्कूली वैन में एलपीजी और सीएनजी किट नहीं लगती है। उनके लिए पेट्रोल या डीजल युक्त वाहन के संचालन का प्रावधान है। यही मानक एंबुलेंस के लिए भी रहता है। फिटनेस जांच में यही देखा जाता है।
आरटीओ में पंजीकृत 4826 अनफिट व्यावसायिक वाहनों को नोटिस जारी किया गया है। परिवहन विभाग के सॉफ्टवेयर से सभी की रिपोर्ट आ गई है। इनमें टेंपो, ऑटो, वैन, स्कूली बस, सवारी बस, ट्रक समेत अन्य व्यावसायिक वाहन शामिल हैं। इनमें 2968 अपनी मियाद पूरी कर चुके हैं। सभी वाहन मालिकों को कार्यालय बुलाया गया है, ताकि पता चल सके कि कौन से वाहन स्क्रैप श्रेणी में आ चुके हैं। -आलोक कुमार सिंह, एआरटीओ प्रशासन कानपुर