पिता का घनिष्ठ मित्र बताकर एक और वसीयत बनवा लाया
इसी बीच मोहल्ले का एक युवक खुद को शांतनु का दत्तक पुत्र बताकर एक वसीयत कोर्ट के सामने ले आया। वहीं, एक और युवक शांतनु को अपने पिता का घनिष्ठ मित्र बताकर एक और वसीयत बनवा लाया। अदालत के सामने जब तीन अपंजीकृत वसीयतें आईं तो उनमें एक वसीयत शांतनु अग्रवाल ने 8 जुलाई 2000 को हर्ष जौहरी के पक्ष में, दूसरी आठ दिसंबर 2000 को जसविंदर सिंह के पक्ष में और तीसरी 15 जून 2001 को आदित्य पांडे के पक्ष में थी।
नौ लोगों के खिलाफ प्रकीर्ण वाद दर्ज करने के आदेश
न्यायाधीश ने जब गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में कार्यरत रहे शांतनु की पत्नी रजनी अग्रवाल को अदालत बुलाया, तो उसने चौंकाने वाला खुलासा किया। रजनी ने शांतनु के दो बेटे होने के साथ ही वसीयतों को फर्जी बताया। फर्जीवाड़े का खुलासा होने पर कोर्ट ने फर्जी वसीयत लाने वाले तीन और उनके छह गवाहों कुल नौ लोगों के खिलाफ प्रकीर्ण वाद दर्ज करने के आदेश कर दिए।
कोर्ट ने कहा- धोखेबाजों पर कार्रवाई जरूरी
न्यायाधीश रघुवीर सिंह राठौर ने आदेश में कहा कि हर्ष जौहरी, आदित्य पांडे और जसविंदर सिंह ने तीन फर्जी वसीयतें तैयार कर न्यायालय के सामने झूठे साक्ष्य के रूप में पेश किया। ये एक गंभीर अपराध है। न्यायालय की गरिमा और जनता की आस्था न्यायपालिका पर बनाए रखने के लिए जरूरी है कि ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
दस्तावेजों की कूटरचना को रोका जा सके
इससे भविष्य में ऐसे दस्तावेजों की कूटरचना को रोका जा सके। कोर्ट ने बहन बताने वाली हर्ष जौहरी, आदित्य पांडे, जसविंदर सिंह के अलावा तीनों वसीयतों के गवाह रहे अशोक कुमार मल्होत्रा, राजेश कुमार सक्सेना, शिव सहाय पांडे, प्रशांत टंडन, अमित त्रिपाठी और पुनीत टंडन के खिलाफ प्रकीर्ण वाद दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
इन सवालों पर फंसा था पेंच
- एक इंजीनियर बिना अपना फोटोग्राफ लगाए और गवाहों से बिना किसी संबंध के अपने परिवार और दो छोटे बच्चों व पत्नी को छोड़कर बिना किसी कारण के परिवार के बाहर अपंजीकृत वसीयत क्यों करेगा।
- 35 साल की छोटी उम्र में शांतनु का आकस्मिक निधन हो गया। इतनी कम उम्र में कोई वसीयत क्यों करेगा।
- वसीयत तैयार करने से पहले ही शांतनु के दो पुत्रों का जन्म हो चुका था तो वसीयत में वह खुुद को नि:संतान क्यों बताते। वसीयत की तारीख पर
- शांतनु के पिता, उसके भाई और दो बहनें भी थीं फिर वह अनजान के पक्ष में वसीयत क्यों करेंगे।
- शांतनु की 35 वर्ष का उम्र थी। वह किसी गंभीर असाध्य रोग से पीड़ित नहीं थे और न ही उन्हें मृत्यु की आशंका थी तो वह इतनी कम उम्र में क्यों वसीयत लिखेंगे।