कानपुर में कोरोना काल में अभिभावक की नॉन कोविड मौत पर भी सरकार बच्चों के भरणपोषण का खर्च उठाएगी। परिवार में दो से अधिक बच्चे हैं तो भी सिर्फ दो को ही मदद मिलेगी। एक बच्चे को प्रतिमाह 2500 रुपये मिलेंगे। शनिवार को जिला प्रशासन को इसकी गाइडलाइन मिली। अब सोमवार से जिला प्रोबेशन कार्यालय में आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी।
कोरोना काल में बड़ी संख्या में मौतें हुईं। कई की मौत कोरोना के चलते ही हुई, लेकिन गुमनामी का शिकार हो गई। उन्हें न तो अस्पताल में जगह मिली और न ही समय पर पुष्ट हो सका कि कोरोना ही था। सरकार ने अब ऐसे बच्चों की मदद की योजना शुरू की है। इसमें वे बच्चे पात्र होंगे, जिनके घर के कमाने वाले शख्स का निधन एक मार्च 2020 के बाद हुआ है।
इसमें माता-पिता अथवा माता या पिता में से किसी एक के निधन होने पर समान रूप से मदद मिलेगी। 18 से 23 साल तक के ऐसे युवा भी योजना में शामिल किए गए हैं, जिनके माता या पिता अथवा वैध अभिभावक में से किसी का निधन हो गया हो और वे 12वीं की पढ़ाई के बाद विश्वविद्यालय, तकनीकी संस्थान में डिग्री या डिप्लोमा, नीट, जेईई, क्लैट जैसी राष्ट्रीय या प्रादेशिक परीक्षा पास कर चुके हों या पढ़ाई कर रहे हों।
ऐसे मेधावी को भी 23 वर्ष की उम्र तक आर्थिक सहायता दी जाएगी। बच्चों को दी जाने वाली सहायता साल में दो बार छह-छह माह की किस्त में दी जाएगी। आवेदन पत्र जिला प्रोबेशन कार्यालय से प्राप्त किया जा सकता है। बता दें कि कोरोना से माता-पिता या अभिभावक को खोने वाले बच्चों को सरकार की ओर से प्रतिमाह चार हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है।
ये भी होेंगे पात्र
बाल श्रम, बाल भिक्षावृत्ति या बाल वेश्यावृत्ति से मुक्त कराए गए बच्चे, जिन्हें पारिवारिक वातावरण में समायोजित कराया गया है।
ये होगी पात्रता
बच्चे के एकल अभिभावक की सालाना आय तीन लाख रुपये से कम होनी चाहिए। एक मार्च 2020 के बाद का मृत्यु प्रमाणपत्र भी जरूरी।