विकास से ठग लिए थे 26,800 रुपये
पुलिस ने आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें भेज दिया गया। डीसीपी क्राइम एसएम कासिम आब्दी ने बताया कि आरोपियों ने चकेरी में रह रहे मूलरूप से पंजाब के अमृतसर निवासी विकास से 14 फरवरी को नौकरी दिलाने के नाम पर 26,800 रुपये ठग लिए थे।
गिरोह के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई होगी
मामले की जांच में जुटी साइबर सेल की टीम ने उन खातों की जानकारी जुटाई, जिनमें रकम मंगाई थी। डीसीपी के अनुसार पकड़े गए गिरोह में कुल 15 सदस्य है। फरार अन्य सदस्यों की तलाश में दबिश दी जा रही है। गिरोह के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही खुलासा करने वाली टीम को 20 हजार रुपये इनाम देने की घोषणा की गई है।
ये सामान हुआ बरामद
पुलिस ने आरोपियों के पास से तीन लैपटॉप, नौ स्मार्ट फोन, 14 की-पैड मोबाइल, आठ मोबाइल सिम कार्ड, एक वाईफाई राउटर, दो बैंक पासबुक, सात डेबिट कार्ड और एक कार बरामद की है। आरोपी फर्जी केवाईसी के जरिए सिम कार्ड भी लेते थे जिसके जरिए नौजवानों को कॉल कर ठगी करते थे। इसके बाद सिमकार्ड बंद कर फेंक देते थे।
10 साल से वारदातों को दे रहे अंजाम
डीसीपी एसएम कासिम आब्दी ने बताया कि गिरोह 2015 से साइबर ठगी की घटना में शामिल हैं। अब तक देश भर में सवा लाख से ज्यादा लोगों को ठगी का शिकार बना चुके हैं। आरोपियों ने एक साल पहले 2.47 लाख रुपये में एक साल के लिए नौकरी.कॉम वेबसाइट का पैकेज ले रखा था।
आरिबा ने घर में बना रखा था पूरा सेटअप
पुलिस ने जब आरिबा के घर में दबिश दी तो टीम को एक कमरे में पूरा सेटअप तैयार मिला। वहां से आरोपी व्हॉट्एप के जरिए वीडियो कॉल करते थे। आरोपियों ने पूछताछ में बताया किया उन्होंने ठगी के लिए (ELITE GLOBAL CAREERS व OVERSEAS CONSULTANCY) नाम की फर्जी वेबसाइट बना रखी थी। वह विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देते थे।
फेक सिम कार्ड से करा लेते थे रजिस्टर्ड
जालसाज फेक नंबर का नौकरी.कॉम वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करा लेते थे। इसके बाद लोगों का डाटा निकाल लेते थे जो विदेशों में नौकरी के लिए अपना रिज्यूम अपलोड करते थे। फिर उन्हें व्हॉट्सएप के जरिए वीडियो कॉल कर ऑनलाइन इंटरव्यू दिलाते थे। फिर ज्वाइन के लिए रुपये ऐंठते थे।
जोइपर सॉफ्टवेयर का करते थे इस्तेमाल
पकड़े गए आरोपी वाइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल से कॉल कर जोइपर सॉफ्टवेयर की मदद से लोगों को कॉल करते थे। इसके जरिए विदेशी कंपनियों के आधिकारिक मोबाइल नंबर को वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल कॉल से कनेक्ट कर देते थे ताकि लोगों को विश्वास हो जाए कि उन लोगों का इंटरव्यू विदेशी कंपनियां ले रही हैं।