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UP: प्रदेश में पांच साल में सबसे ज्यादा सड़क हादसे और मौतें कानपुर में, चौंका देंगे ये आंकड़े

Mon, 31 Mar 2025 02:01 PM IST
शिखा पांडेय वाचस्पति पांडेय, अमर उजाला, कानपुर

सार

सड़क हादसों और जान गंवाने वालों में कानपुर सबसे ऊपर है। पांच साल में 6792 सड़क दुर्घटनाओं में 2999 लोगों की मौत हुई। 4860 लोग घायल हुए।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जिले में पिछले पांच वर्षों में सड़क हादसों में काफी वृद्धि हुई है। हादसों के मामलों में कानपुर अव्वल है। इसके अलावा हादसे में जान गंवाने वालों में भी जिला टॉप पर है। जिले में पांच साल में 6792 हादसे हुए। इनमें 2999 लोगों ने अपनी जान गंवा दी। 4860 लोग इन हादसों में घायल हुए।
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जिला प्रशासन और यातायात विभाग की ओर कोई सार्थक प्रयास नहीं करने से हादसों और जान गंवाने वालों के मामले में कानपुर सबसे आगे निकल गया। जहां भी ब्लैक स्पॉट है, उन स्थानों को चिह्नित तो किया गया पर उसे डेंजर जोन घोषित करते हुए साइनेज लगाने की जरूरत महसूस नहीं की गई। यातायात विभाग ने हाईवे पर तीन चौराहों का चिह्नांकन कर हादसों की वजह खोजकर रिपोर्ट शासन को भेज दी है। साथ ही हादसों में घायल लोगों की जानकारी तो विभाग के पास है पर बाद में कितने घायलों की मौत हो गई, इसका डाटा नहीं है। यातायात विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच सालों में हुए हादसों में जान गंवाने वालों के मामले में प्रयागराज दूसरे स्थान पर और बुलंदशहर तीसरे स्थान पर है।
 
शहर  दुर्घटनाएं  मृतक घायल
कानपुर नगर 6792 2999 4860
प्रयागराज 6230  2784 4066
बुलंदशहर 4749 2710 3702
आगरा 5080 2696 3673
हरदोई 4935 2604  2648
लखनऊ 6507 2595  4338
मथुरा 4483  2523 3904
अलीगढ़ 4619 2467 4207
उन्नाव 4199 2453 3104
बरेली 5155 2308 4299
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इन वजहों से गई जान
विभाग ने हादसों का कारण जानने के लिए नौबस्ता चौराहे, भौंती बाईपास और घाटमपुर चौराहे पर निगरानी की। दुर्घटनाओं के कई कारण सामने आए हैं। नौबस्ता चौराहे से मिले आंकड़ों के अनुसार, मार्केट जोन में 63 हादसे हुए। खुले स्थानों पर 58 हादसे हुए। दिन में 74 और रात में 15 दुर्घटनाएं हुईं। 27 हादसे ऐसे थे, जिनमें वाहन ने राहगीर को टक्कर मारी।

आमने-सामने भिड़ंत : नौबस्ता चौराहे पर मिले आंकड़ों के अनुसार 77 मामलों में वाहनों में आमने-सामने भिड़ंत हुई।
यातायात नियमों का पालन न करना : नौबस्ता चौराहे पर यातायात नियमों का पालन न करने से 51 हादसे हुए।
तेज गति : तेज गति के कारण नौबस्ता चौराहे पर 36 हादसे हुए।
ड्राइवर की लापरवाही : हाईवे पर ड्राइवर की लापरवाही के कारण 34 हादसे हुए।

हादसों को रोकने के लिए लखनऊ में की गई थी बैठक
प्रदेश में सर्वाधिक दुर्घटना वाले 20 जिलों में दुर्घटनाएं और मृतकों की संख्या में कमी आए, इसके लिए 20 मार्च को लखनऊ के योजना भवन स्थित एनआईसी सेंटर में बैठक की गई थी। प्रमुख सचिव परिवहन विभाग की अध्यक्षता में की गई बैठक में सभी जिलों के जिलाधिकारी, कप्तान, मंडलायुक्त, उप परिवहन आयुक्त, संभागीय परिवहन अधिकारी, क्षेत्रीय प्रबंधक, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता समेत अन्य विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। पुलिस सूत्रों के अनुसार पिछले वर्ष कुल नौ बैठक हुई, लेकिन हादसों की संख्या कम नहीं हुई।
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लगातार पढ़ाया जा रहा यातायात नियमों का पाठ
सड़क सुरक्षा समिति के साथ लगातार बैठकें की जा रही हैं। नुक्कड़ नाटक, पाठशाला आयोजित कर स्कूल-कॉलेजों में यातायात नियमों का पाठ पढ़ाया जा रहा है। अन्य कमियों को जल्द दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। - अखिल कुमार, पुलिस कमिश्नर

आमजनों से मांगी जा रही है राय
हादसों पर अंकुश लगे, इसके लिए आमजनों से भी राय मांगी जा रही है। हाल ही में जागरूकता फैलाने के लिए 500 हेलमेट बांटे गए थे। हाईवे पर ब्लैक स्पॉट के लिए पत्राचार किया जा रहा है। - रविंद्र कुमार, डीसीपी ट्रैफिक
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