कोल्ड स्टोरेज में आलू बीज की छंटाई करते किसान।
- फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। इस साल हुई आखिरी बारिश ने आलू की अगेती फसल लेने के किसानों के अरमान बहा दिए हैं। बारिश से फसल प्रभावित होने से किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया। अब यह पिछेती (पक्की फसल) की तैयारी कर रहे हैं।
जिले में हर साल 50 हजार 250 हेक्टेयर रकबे में आलू की फसल होती है। करीब 12 लाख 29 हजार 88 मीट्रिक टन आलू का उत्पादन होता है। उपजाऊ जमीन होने से यहां के किसान आलू की दो बार फसल करते हैं। अगेती फसल की 25 अगस्त से 15 सितंबर तक बुवाई कर ली जाती है। दो माह में खुदाई कर किसान बिक्री कर देते हैं। इसके बाद पिछेती फसल कर कोल्ड स्टोरेज में आलू भंडारित कर लिया जाता है। इस बार सितंबर में हुई तेज बारिश से अगेती फसल का समय निकल गया। कुछ किसानों ने बुवाई की थी। बारिश और तेज धूप से आलू बीज सड़ गया। किसानों का कहना है कि आलू की अगेती फसल में सालभर की कमाई निकल आती है। इस बार बारिश के चलते अगेती फसल न होने से अरमान बह गए। अब पिछेती फसल पर उम्मीदें टिकी हैं। खेतों की जुताई कर किसान कोल्ड स्टोरेज से आलू निकासी कर रहे हैं।
मौसम के मिजाज से धड़कनें तेज, डंप है बीज
तेज धूप और बादलों का उमड़ना जारी है। इससे किसान साफ मौसम का इंतजार कर रहे हैं। जिला उद्यान अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि अगर इस सप्ताह बारिश हो गई तो पिछेती फसल का भी खेल बिगड़ जाएगा। यही कारण है कि अभी तक जिले के 142 कोल्ड स्टोरेज में पांच लाख 58 हजार मीट्रिक टन आलू भंडारित है।
शासन ने तय किया एक हजार क्विंटल बीज का आवंटन
बेहतर उत्पादन के लिए शासन ने जिले के किसानों के लिए एक हजार क्विंटल आलू बीज आवंटन निर्धारित किया है। इस साल दो हजार 80 रुपये प्रति क्विंटल प्रथम प्रजाति और 16 सौ 95 रुपये द्वितीय प्रजाति की दर निर्धारित की गई है। जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि 3797 ऊपरी बहार, ऊपरी सूर्या, सिंदूरी, पुखराज और ख्याति प्रजाति का बीज आ गया है। प्रथम आवक, प्रथम पावक पंजीकरण के अनुसार किसानों को आलू बीज की बिक्री की जाएगी।