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मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ रहीं दर्द और फंगस की दवाई

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कन्नौज। फंगस और दर्द की सरकारी दवा के नमूने जांच में फेल होने के बाद मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। इन दवाओं को न तो शासन ने वापस मंगाया और न ही दूसरी दवाएं भेजीं है। ऐसे में मरीजों को सरकारी अस्पताल में चिकित्सक से सलाह तो मिल जाती है, लेकिन दवाएं मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ रहीं हैं।
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जिला चिकित्सालय में इन दिनों 300-400 मरीजों की ओपीडी होती है। मंगलवार को 364 मरीज ओपीडी में आए। इसमें ज्यादातर उल्टी, दस्त, फंगस से संबंधित बीमारियों से पीड़ित थे। फंगस के मरीजों की संख्या करीब 90 रही। मरीजों ने डॉक्टर को अपनी समस्या बताकर दवाएं तो लिखा लीं, लेकिन उन्हें मेडिकल स्टोर से ही खरीदनी पड़ी। छह माह से जिला चिकित्सालय में त्वचा संबंधित बीमारियों को राहत देने वाली क्रीम का टोटा है। इन्हें भी मरीजों को बाहर के मेडिकल स्टोर से खरीदना पड़ रहा है।
वेयर हाउस में छह माह से रखी 12 हजार मिकोनाजोल क्रीम
त्वचा संबंधित इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग को मिकोनाजोल क्रीम की सप्लाई की जाती रही। यह क्रीम फंगस के उपचार के लिए अहम मानी जाती है। स्वास्थ्य विभाग के वेयर हाउस को दिसंबर में ही 12000 मिकोनाजोल क्रीम की खेप भेजी गई थी, लेकिन जांच को भेजे गए नमूने ही फेल हो गए। इससे छह माह से मिकोनाजोल क्रीम वेयर हाउस में रखी धूल खा रही हैं।
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बिल्हौर के रहने वाले शादाब को कई दिनों से पैरों में खुजली हो रही है। दवा लेने के लिए मंगलवार को जिला अस्पताल पहुंचे। ओपीडी में डॉक्टर को दिखाया तो पर्चा पर मिकोनाजोल क्रीम लिखकर दवा काउंटर से लेने की सलाह दी। दवा काउंटर पर गए तो वहां क्रीम मिली ही नहीं।
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मानामीऊ निवासी फूलमती को शरीर में खुजली की शिकायत थी। उपचार के लिए जिला अस्पताल की ओपीडी में डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने बीटामेथोसोन क्रीम समेत अन्य दवाएं लिखी। दवा काउंटर पर अन्य दवा तो मिल गई, लेकिन खुजली की मुख्य क्रीम मिली ही नहीं।
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जलालपुर पनवारा निवासी नमन को त्वचा में फंगस की शिकायत थी। इलाज के लिए जिला अस्पताल के डॉक्टर को दिखाया और दवा लिखा ली। दवा के काउंटर से दो दवा ही मिली।
नसरापुर निवासी संतोष को शरीर में बीते कुछ दिनों से खुजली हो रही थी। इलाज के लिए जिला अस्पताल के डॉक्टर को दिखाकर दवा लिखाई। दवा काउंटर से खुजली की क्रीम को छोड़कर बाकी दवा ही मिल पाई।
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इनकी भी सुनिए :
जिला चिकित्सालय के फार्मासिस्ट सुरेश कुमार ने बताया कि एक माह में सिर्फ दो बार ही डिमांड भेजी जा सकती है। अभी तक करीब 10 बार त्वचा संबंधित दवाओं को लेकर कार्पोरेशन को पत्र भेज जा चुका है।
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