कन्नौज। लगातार नरौरा बांध से छोड़े जा रहे पानी से गंगा और काली नदी उफनाने लगी है। रविवार को काली और गंगा नदी के तराई क्षेत्र के 30 गांवों के किसानों की फसलें बाढ़ के पानी में डूब गईं। करीब ढाई हजार बीघे में खड़ी हरी सब्जियों की फसल बर्बाद हो गई। रविवार की सुबह किसान अपने खेतों पर फसल देखने पहुंचे तो वहां घुटनों तक पानी भरा हुआ था। यह नजारा देखकर किसानों के होश उड़ गए। यहां की हरी सब्जियां दिल्ली, कानपुर समेत कई जिलों की सब्जी मंडियों में जाती हैं।
जिले में काली और गंगा नदी के तराई क्षेत्र के खेत हरी सब्जी की पैदावार के लिए जाने जाते हैं। यहां अक्तूबर से दिसंबर तक उगाई जाने वाली धनिया, हरा प्याज (सागा), गोभी और सोया मेथी दिल्ली, धनीपुर अलीगढ़, कानपुर, हरदोई से लेकर लखनऊ तक की सब्जी मंडियों में बिक्री के लिए जाती है।
शुक्रवार से बढ़ रहे गंगा और उसकी सहायक काली नदी के जलस्तर ने अलियापुर, जुकैया, अड़ंगापुर, चौराचांदपुर, दाईपुर, गदनपुर नराह, कुसमखोर, तहसीपुर, पैंदाबाद, सदिकापुर, कटरी अमीनाबाद, जलालपुर अमरा, रिजगीर, चौधरियापुर और मेंहदीपुर समेत करीब 30 गांव के सैकड़ों किसानों को तबाह कर दिया। किसानों की ढाई हजार बीघा हरी सब्जियों की फसलें नष्ट हो गई।
जुकैया में रहने वाले किसान सिब्बू और रामकुमार ने बताया कि शनिवार शाम दूर-दूर तक पानी नहीं था। रविवार सुबह खेतों में घुटने से भरे पानी को देखकर होश उड़ गए। अब परिवार का गुजर-बसर करने में मुश्किल होगा।
सर्वे कर किसानों को मिलेगा मुआवजा
गंगा और काली नदी के जलस्तर से किसानों को लंबा नुकसान हुआ है। मंगलवार से गंगा का जलस्तर कम हो जाएगा। इसके बाद लेखपालों की टीम से नुकसान हुई फसलों का सर्वे कराया जाएगा। शासनस्तर से किसानों को मुआवजा दिया जाएगा।
गौरव कुमार शुक्ला, एसडीएम, सदर
कन्नौज। नरौरा बांध से छोड़े जा रहे पानी से गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के नजदीक पहुंच गया। गंगा नदी के मुहाने पर बसे कासिमपुर, बख्सीपुर्वा और गुलाबपुर्वा गांव को बाढ़ ने अपनी चपेट में ले लिया है। प्रशासनिक अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा शुरू कर दिया। निगरानी के लिए कटरी क्षेत्र में 15 राजस्व टीमों को लगाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि लगातार जलस्तर बढ़ता है तो कटरी के 18 गांव बाढ़ की चपेट में आ जाएंगे।
गंगा का जलस्तर रविवार को 125.480 सेंटीमीटर दर्ज किया गया। यह खतरे के निशान 125.970 से महज 49 सेंटीमीटर दूर है। अगर खतरे का निशान पार होता है तो कटरी के 18 गांवों में घुटने तक पानी भर जाएगा। पतित पावनी के बदलते स्वरूप को देखकर कटरी में रहने वाले लोगों ने आपदा से निपटने के लिए सामान समेट कर सुरक्षित इलाकों की तरफ जाने की तैयारी शुरू कर दी है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर इसी तरह जलस्तर बढ़ता रहा तो मुसीबत और बढ़ जाएगी। एसडीएम गौरव कुमार शुक्ला ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर जायजा लिया और लोगों को सुरक्षित शरणालयों में जाने की अपील की। एसडीएम ने बताया कि लेखपाल और उप निरीक्षकों की 15 टीमों को लगाया गया है। यह टीमें पल-पल जलस्तर की निगरानी कर रिपोर्ट दे रही हैं। बाढ़ के हालातों से निपटने के लिए मोटर वोट और गोताखोरों के अलावा अस्थायी राहत बचाव शिविर लगाने की तैयारी भी पूरी कर ली गई है।