भाजपा में वाराणसी लोकसभा सीट पर उम्मीदवारी को लेकर चल रहे विवाद के बीच मुरली मनोहर जोशी ने अपने मन की पीड़ा जाहिर की है।
वाराणसी सीट छोड़ना नहीं चाह रहे जोशी ने दार्शनिक अंदाज में कहा है कि उन्होंने कुछ पाप किए होंगे, जिसके चलते वह संसद पहुंचे।
हालांकि इस बात से उनका आशय क्या था, यह उन्होंने साफ नहीं किया। पद्मभूषण पंडित छन्नू लाल मिश्र के सम्मान समारोह में मंगलवार रात पहुंचे जोशी ने संसद को पाप के फलस्वरूप मिली जगह करार दिया।
संसद को बताया पाप
उन्होंने शास्त्रीय संगीत की साधना का बखान करते हुए कहा कि कुछ पुण्य था, जो कि भारत जैसे देश में जन्म लिया। प्रयाग और काशी में रहने का मौका मिला लेकिन कुछ पाप भी किया होगा जिसके चलते संसद में हूं।
संसद में जाने के पीछे के अपने किस ‘पाप’ की बात जोशी कर रहे थे, इसका खुलासा उन्होंने नहीं किया। हालांकि उनकी इस बात पर जमकर ठहाके जरूर लगे। उन्होंने कहा कि संगीत इस देश की महान विधा है।
राजनाथ से हुई तीखी बहस
मैं विज्ञान का विद्यार्थी हूं राजनीति में आकर फंस गया हूं पर मेरी कामना है कि संगीत का यह अनहद नाद इसी तरह हमेशा गूंजता रहे। जोशी अपनी पुरानी सीट वाराणसी से ही इस बार भी चुनाव लड़ना चाह रहे हैं, जबकि भाजपा इस सीट से नरेंद्र मोदी को उतारना चाहती है।
पार्टी ने जोशी को नैनीताल या कानपुर सीट से लड़ने का प्रस्ताव दिया है। मालूम हो कि सीट के इस विवाद को लेकर पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में जोशी की पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह से भी तीखी बहस हुई थी। हालांकि बाद में जोशी ने कहा था कि पार्टी जो भी फैसला करेगी, वह स्वीकार करेंगे।