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तेरहवीं से लौट रहे युवक की मार्ग दुर्घटना में मौत

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झांसी। तेरहवीं से लौट रहे रक्सा निवासी युवक की मार्ग दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई। युवक बाइक से अपने दोस्तों के साथ वापस लौट रहा था। बरुआसागर चौराहे के पास उसकी बाइक दूसरी बाइक से भिड़ गई। उसकी मौत की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। युवक दो बहनों के बीच इकलौता भाई था। दुर्घटना में एक महिला समेत पांच लोग घायल हो गए। इनको मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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रक्सा निवासी सुरेश अहिरवार की रिश्तेदारी मऊरानीपुर में है। वहां बुधवार को मृत्युभोज का आयोजन था। सुरेश को भी न्यौता दिया गया था लेकिन, उसने अपने सबसे छोटे बेटे सचिन (19) को वहां भेज दिया। दोपहर को सचिन सबसे पहले मैरी गांव पहुंचा। यहां से अपने दो दोस्त छोटू उर्फ जितेंद्र (25) एवं सतीश (30) को लेकर मऊरानीपुर गया था। देर-शाम तीनों एक बाइक पर सवार होकर घर वापस लौट रहे थे। जैसे ही वह लोग बरुआसागर के घुघुवा गांव से थोड़ा आगे निकले तभी नैगुआ पुल पर विपरीत दिशा से अचानक एक तेज रफ्तार मोटर साइकिल सामने आ गई। दोनों ही सवार अपने वाहन नहीं संभाल सके और एक दूसरे से जा भिड़े। दोनों बाइक की रफ्तार तेज होने से उसमें सवार सभी लोग घायल होकर सड़क पर गिर पड़े। विपरीत दिशा में आ रही बाइक में महिला भी सवार थी। वह भी गंभीर रूप से घायल हो गई। तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग भी वहां जमा हो गए। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। थोड़ी देर में पीआरवी 383 भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने अशोक रायकवार (48), लक्ष्मी रायकवार (40) एवं उसके पुत्र पवन (17) समेत छोटू एवं सतीश को महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज भिजवाया। अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने सचिन को मृत घोषित कर दिया जबकि अन्य घायलों की हालत नाजुक बताई जा रही। दुर्घटना की सूचना मिलते ही रोते-बिखलते परिजन भी अस्पताल पहुंच गए। शाम को पोस्टमार्टम के बाद सचिन का शव परिजनों को सौंप दिया गया।
दो बहनों में अकेला था सचिन, बहनों का रो-रोकर बुरा हाल
सचिन दो बहन करिश्मा एवं कंचन के बीच अकेला था। जैसे ही दुर्घटना की खबर उसके घर पहुंची परिजनों के होश उड़ गए। मां-बाप समेत उसकी बहनें भी जिस हालत में थीं, उसी में बदहवास दशा में अस्पताल पहुंच गईं। थोड़ी देर बाद ही डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। यह सुनते ही मां एवं बहनें गश खाकर गिर पड़ीं। तब तक उनके अन्य परिजन भी अस्पताल पहुंच गए थे। सभी ने मिलकर उन लोगों को किसी तरह संभाला लेकिन, उसकी बहनों के आंसू नहीं थम रहे थे। वह लोग अपनी मां को पकड़कर फफक-फफक कर रो रहीं थीं।
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