झांसी। बुंदेलखंड के लिए सौगात बनी मेमू ट्रेन चौदह दिन के भीतर ही पुरानी लगने लगी है। ट्रेन के वॉशबेसिन के नल, टॉयलेट के प्रेशर पाइप समेत तमाम सामान गायब हो गया है। यात्री कूड़ा फैलाकर भी कोचों को गंदा कर रहे हैं। खासकर बांदा की तरफ जाने वालीं दोनों मेमू गाड़ियों का बुरा हाल है। बुधवार को अमर उजाला की टीम ने ट्रेनों की पड़ताल की तो दो हफ्ते पहले चकाचक दिखने वाली यह ट्रेन अब गंदी दिख रही है।
रेल मंडल में 30 सितंबर से अप और डाउन की पांच जोड़ी मेमू ट्रेनों का संचालन शुरू किया गया था। इन ट्रेनों के चलने से छोटे स्टेशनों के यात्रियों के लिए सफर करना बेहद सुविधाजनक हो गया है। इनमें झांसी से बांदा के लिए दोपहर 12.25 बजे, झांसी से मानिकपुर के लिए शाम 5.25 बजे, झांसी से ललितपुर के लिए सुबह 6.10 बजे, झांसी से कानपुर के लिए सुबह 8.50 बजे और ललितपुर से बीना के लिए सुबह 10.25 बजे मेमू चलती है। मेमू ट्रेन की कई सुविधाएं सफर की थकान को कम करती हैं। मेमू ट्रेन के दरवाजे बड़े हैं, जिससे यात्रियों को चढ़ने तथा उतरने में आसानी होती है। यात्रियों के लिए सीट के अलावा कोच में खड़े रहने के लिए हैंडल की सुविधा है। मेमू कोच में लाइटिंग तथा पंखों की संख्या अधिक है। ट्रेन के कोच अंदर से एक दूसरे से कनेक्ट होते है, जिससे यात्री एक कोच से दूसरे कोच में आसानी से आ-जा सकते हैं। कोच में बायो टॉयलेट की सुविधा है। टॉयलेट में मैटिंग बिछाई गई है। साथ ही इंडियन सीट के साथ जंजीर से बंधा स्टील का डिब्बा, प्रेशर पाइप व वॉशबेसिन लगा है।
मगर दो हफ्तों में ही मेमू ट्रेनों से उपकरण चोरी होना शुरू हो गए हैं। दोपहर 12.25 बजे झांसी से बांदा जाने वाली मेमू गाड़ी में एनसी 21805, एनसी 218306, एनसी 218311, एनसी 218312, एनसी 218313, एनसी 218314,एनसी 218315 व 218316 नंबर के कोच लगे हैं। इनमें छह कोचों के टॉयलेट से वॉशबेसिन नल, चार कोचों के प्रेशर पाइप, दो कोच की मैटिंग चोरी हो गए हैं। ऐसा ही हाल दूसरी मेमू गाड़ियों का भी हो गया है।
- रेलवे संपत्ति की सुरक्षा करना हम सबकी जिम्मेदारी है। यात्रियों को जागरूक बनकर अपने नागरिक कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।
मनोज कुमार सिंह, पीआरओ।
मेमू बुंदेलखंड के लिए सौगात बनकर आई है। अगर कोई इसे नुकसान पहुंचाता है तो यह गलत है।
लालाराम प्रजापति, अंदर लक्ष्मीगेट।
मुझे इस ट्रेन में सफर करने में बेहद आराम महसूस हो रहा है। ट्रेन में जो सुविधाएं हैं उनको सुरक्षित रखना हम सबका कर्तव्य है।
इकबाल खान, मटौंध।
एक्सप्रेस ट्रेन की तरह किराया लेना गलत है। पहले मैं 35 रुपये में बांदा पहुंच जाता था। अब 75 रुपये देने पड़ रहे हैं।
फरीद खान, बांदा।
नई ट्रेन हैं। इसके बाद भी अधिकांश कोचों में गंदगी फैली पड़ी है। ट्रेन में प्रतिदिन सफाई की व्यवस्था होनी चाहिए।
पवन कुमार गुप्ता, बांदा।