झांसी। बजट की कमी से लक्ष्मीताल के पास बन रहे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का काम बंद हो गया है। जल्द ही इसके शुरू होने की उम्मीद भी नजर नहीं आ रही है। केंद्र सरकार के हाथ पीछे खींचने से यह स्थिति बन गई है। पहले केंद्र ने लागत का सत्तर फीसदी देने पर सहमति जताई थी, परंतु अब पचास फीसदी धनराशि ही देने पर केंद्र राजी हैं। बाकी पैसे की जुगाड़ राज्य सरकार को करनी होगी।
शहर के ऐतिहासिक लक्ष्मीताल को और सुंदर बनाने व वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना के लिए 53 करोड़ रुपये की योजना बनाई गई थी।
इसमें से 24 करोड़ रुपये ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना पर खर्च किए जाने हैं। योजना को साकार रूप देने के लिए साल 2015 के आखिरी में 3.57 करोड़ रुपये जल निगम को मिले थे। इसमें से 2.5 करोड़ केंद्र व 1.07 करोड़ रुपये राज्य सरकार ने दिए थे। योजना के पहले चरण में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण शुरू किया गया था। तब यह तय हुआ था कि उक्त परियोजना पर आने वाली लागत का 70 फीसदी केंद्र व 30 प्रतिशत खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। लेकिन, अब इसमें बदलाव कर दिया है।
केंद्र सरकार पचास फीसदी धनराशि ही देने पर राजी है, जबकि शेष पचास फीसदी राज्य सरकार को खर्च करने होंगे। इससे मामला लटक गया है। पूर्व में मिला बजट खत्म हो गया है। आगे के काम के लिए रकम की जुगाड़ न होने से पिछले एक पखवाड़े से काम बंद पड़ा हुआ है। केंद्र सरकार अब बजट की अगली किस्त तब ही देगी, जब प्रदेश सरकार द्वारा इस पर केंद्र के बराबर ढाई करोड़ रुपये उपलब्ध करा दिए जाएंगे।
ऐसे साफ होगा गंदा पानी
लक्ष्मी ताल में पांच नालों से गिरने वाले शहर के गंदे पानी को सीधे प्लांट में ले जाया जाएगा। प्लांट में प्रतिदिन 26 एमएलडी पानी को यूरोपियन स्टैंडर्ड के अनुरूप शुद्ध किया जाएगा। इसमें से 22 एमएलडी पानी 10 बीओडी (बायो केमिकल ऑक्सीजन) तक साफ किया जाएगा। इस पानी को नारायण बाग से गुजरने वाले नाले के माध्यम से पहूज नदी में छोड़ा जाएगा। जबकि, शेष चार एमएलडी पानी का और भी अधिक शुद्ध कर चार बीओडी (नहाने योग्य) तक किया जाएगा, यह पानी लक्ष्मीताल में छोड़ा जाएगा।
अभी ‘डेड वाटर’ है ताल का पानी
वर्तमान में लक्ष्मीताल का पानी ‘डेड वाटर’ की श्रेणी में है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा ताल के पानी को मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताया गया है। बोर्ड द्वारा पिछले चार सालों में पानी का 38 बार परीक्षण किया गया। सभी रिपोर्टों में पानी अत्यधिक प्रदूषित पाया गया। परीक्षण में ताल के आसपास का भूगर्भ जल भी प्रदूषित पाया गया।
‘केंद्र सरकार ने प्रावधान किया है कि जो प्रोजेक्ट 31 मार्च 2015 के बाद स्टार्ट हुए हैं, उनमें केंद्र व राज्य पचास-पचास फीसदी का खर्च करेंगे। अब केंद्र का कहना है कि पूर्व में उसके द्वारा ढाई करोड़ रुपये दिए गए थे। अब इतनी ही रकम प्रदेश सरकार के आवंटित करने पर केंद्र काम के लिए अगली किस्त जारी करेगा। फिलहाल काम बंद पड़ा हुआ है।’
- राजेश मित्तल, मुख्य अभियंता- जल निगम