झांसी। उप्र सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) ने जलसंस्थान में वर्षों पहले हुए भुगतान में गड़बड़ी की जांच दोबारा शुरू कर दी है। इस मामले में 41.95 करोड़ रुपये का घपला मिला था और 86 अफसरों और कर्मचारियों को दोषी पाया गया था। पूर्व में हुई जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई के लिए शासन को 2019 में पत्र भेजा गया था। लेकिन, पत्र का जवाब नहीं आया। इसके बाद अब दोबारा जांच करने को कहा गया है।
झांसी डिवीजन जलसंस्थान के तत्कालीन महाप्रबंधक द्वारा एक अप्रैल 2005 से लेकर 31 मार्च 2017 के मध्य विभिन्न सामग्रियों की खरीद की थी। इसमें कुछ सामग्री ऐसी भी खरीदी गई थी, जिसका कोई टेंडर नहीं हुआ था। इसमें जीआई पाइप, प्रेशर पाइप सहित अन्य सामग्री खरीदी गई थी। विजिलेंस द्वारा पूर्व में की गई जांच के दौरान सवा लाख पन्नों का रिकार्ड खंगाला था। रिकार्ड के अनुसार 508 करोड़ रुपये का बजट दिया गया था, जिसमें 126 करोड़ से सामग्री की आपूर्ति और 292 करोड़ रुपये से मरम्मत कार्य कराया गया था। बाकी बजट वेतन, पेंशन और अन्य भुगतानों में खर्च हुआ था।
विजिलेंस ने पूरे कामों का एस्टीमेट मांगा था, लेकिन विभाग उपलब्ध नहीं करा सका था। बाद में जांच के दौरान 86 अधिकारी और कर्मचारी चिह्नित किए गए थे। फर्जी बिलों पर चालीस फीसदी भुगतान किया गया है। जांच में 41.95 करोड़ रुपये का घोटाला मिला था। इसमें महाप्रबंधक, अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता, अवर अभियंता समेत अन्य अधिकारी समेत कुल 86 अधिकारी और और कर्मचारी दोषी पाए गए थे।
जांच के बाद रिपोर्ट शासन को भेज दी गई थी। 31 दिसंबर 2019 को भेजी गई रिपोर्ट पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब मामले की दोबारा जांच शुरू कर दी गई है। इसमें विजिलेंस ने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर जांच करने को पत्र लिखा है।