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अहिंसा के रास्ते पर चलकर विश्व विकास कर सकता

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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में हिंदी समारोह सप्ताह के अंतर्गत भारतेंदु हरिश्चंद्र की 171वीं जयंती पर वाद-विवाद प्रतियोगिता हुई। इसमें बीयू कैंपस, महिला महाविद्यालय, केंद्रीय विद्यालयों समेत कई कॉलेजों के विद्यालयों ने विश्व शांति के लिए निरस्त्रीकरण आवश्यक है विषय के पक्ष, विपक्ष में अपनी राय रखी। पक्ष में विचार व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों ने कहा कि अहिंसा के रास्ते पर चलकर विश्व विकास कर सकता है।
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छात्रों ने कहा कि वसुधैव कुटुंबकम की भारतीय संकल्पना को मूर्त रूप दिया जा सकता है। जबकि, विपक्ष में बोलते हुए वक्ताओं ने कहा कि शक्तिशाली और आयुध संपन्न शक्ति से ही हम शत्रु को शांति के लिए बाध्य कर सकते हैं। निष्कर्षत: यह कहा गया कि जब तक एक भी व्यक्ति या राष्ट्र शांति के लिए तत्पर नहीं होता तब तक निरस्त्रीकरण मात्र एक सुखद स्वप्न सरीखा है। मुख्य अतिथि कुलसचिव नारायण प्रसाद ने कहा कि हम सभी शांति चाहते हैं लेकिन विश्व के कुछ देशों ने हथियारों का व्यवसाय खोल रखा है। इसी व्यवसाय को बनाए रखने के लिए वैश्विक स्तर पर कई देशों में आंतरिक और बाह्य शक्तियों को गतिरोध उत्पन्न करने के लिए ये फंड उपलब्ध कराते रहते हैं। कार्यक्रम संयोजक डॉ. पुनीत बिसारिया ने आधुनिक हिंदी के निर्माता भारतेंदु हरिशचंद्र के जीवन पर प्रकाश डाला। इस दौरान डॉ. कौशल त्रिपाठी, डॉ. अजीत कुमार, डॉ. श्रीहरि त्रिपाठी, डॉ. नवीनचंद्र पटेल, डॉ. मो. नईम मौजूद रहे।
अब ये कार्यक्रम होंगे
10 सिंतबर को सोशल मीडिया वरदान या अभिशाप विषय पर भाषण प्रतियोगिता, 11 को हिंदी का भविष्य स्वर्णिम है विषय पर निबंध लेखन प्रतियोगिता और 13 सिंतबर को स्वरचित कविता प्रतियोगिता होगी। इसमें महाविद्यालयों तथा विद्यालयों के कक्षा 6 से कक्षा 12 तक के विद्यार्थी भाग ले सकते हैं। 14 सितंबर को हिंदी दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में विजयी विद्यार्थियों एवं समस्त प्रतिभागी छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया जाएगा। सभी कार्यक्रम हिंदी विभाग में दोपहर 12 बजे से होंगे।
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