इंफ्रास्ट्रक्चर में हो रहे तेज बदलाव के चलते अगले दो दशकों में महानगर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह बदल जाएगी। इसकी रूपरेखा अभी से तय करने के लिए नगर निगम कवायद में जुटा है। करीब चालीस लाख रुपये से यह प्लान तैयार कराया जा रहा है। इसमें देश की जानी-मानी कंपनी राइटस भी मदद कर रही है। निगम अभियंताओं के मुताबिक आने वाले समय में शहरों का ट्रैफिक लोड बीस-पचास फीसदी बढ़ने की उम्मीद है।
निजी वाहनों के साथ ही सार्वजनिक परिवहन के वाहनों की संख्या भी बढ़ेगी। इसके लिए एलिवेटेड पुल, फ्लाईओवर एवं ओवरब्रिज की संख्या बढ़ेगी। अनियंत्रित ट्रैफिक का बोझ अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। इसको देखते हुए प्रत्येक स्मार्ट सिटी के लिए विशेष मोबेलिटी प्लान तैयार कराया जा रहा है। इंदौर, भोपाल, लखनऊ, प्रयागराज, बनारस जैसे शहरों की तर्ज पर झांसी में भी आने वाले समय में बनने वाले सड़क, चौराहे, फ्लाई ओवर, ओवर ब्रिज आदि का निर्माण इसके मुताबिक ही कराया जाएगा।
राइटस ने प्रांरभिक सर्वे आरंभ शुरू कर दिया है। एजेंसी शहर के प्रत्येक चौराहे एवं सड़कों का सर्वे करेगी। सर्वाधिक व्यस्त चौराहे एवं सड़क मार्ग को चिन्हित करेगी। इनका ट्रैफिक लोड कम करने का विकल्प सुझाया जाएगा। अत्याधिक ट्रैफिक लोड वाली सड़कें वन वे बनाई जाएंगी। सार्वजनिक परिवहन का रूट भी एजेंसी सुझाएगी। शहर में अभी कोई ट्रांसपोर्ट नगर नहीं है। इसकी जगह भी मोबिलिटी प्लान के मुताबिक तय होगी। एक्सईएन एमके सिंह के मुताबिक इसे चरणबद्घ तरीके से लागू किया जाएगा। जेडीए सीमा में शामिल सभी इलाके इसमें शामिल किए गए हैं।