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पुलिस चौकी में फांसी लगाने वाला कारोबारी 51 दिनों तक कोमा में ही रहा

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झांसी/बरुआसागर। पुलिस चौकी में फांसी लगाने वाले बरुआसागर के व्यवसायी अजय सोनी के शरीर में चोट इतनी गहरी थी कि वह 51 दिन तक आईसीयू से बाहर नहीं आ सका। 26 सितंबर को जिस हालत में पुलिस ने उसे महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया था, ठीक उसी दशा में वह 15 नवंबर तक पड़ा रहा। उसकी हालत में रत्ती भर सुधार नहीं हुआ। परिजनों का कहना है इतने दिनों में अजय के शरीर में कोई भी मूवमेंट नहीं हुआ। वह लोग आईसीयू के बाहर लगातार मौजूद रहे लेकिन, अजय के शरीर में कोई भी हरकत नहीं हुई। वह कोमा से बाहर नहीं निकल सका। उसकी हालत जस की तस बनी रही। हालत यह थी कि डॉक्टरों को ड्रिप लगाने के लिए गले के नीचे बाईपास सर्जरी करनी पड़ी। उसी के सहारे उसे लिक्विड फूड दिया जाता रहा लेकिन, उसकी हालत में कोई भी सुधार नहीं हुआ। आखिरकार सोमवार को उसकी मौत हो गई। उसकी मौत के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया।
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पोस्टमार्टम न कराने पर अड़े परिजन, मान-मनौव्वल के बाद हुए राजी
भारी सुरक्षा व्यवस्था की मौजूदगी में पैतृक गांव में हुआ अंतिम संस्कार
अजय के परिजन उसका पोस्टमार्टम न कराने पर अड़ गए। सोमवार की रात को पुलिस ने उसका शव कब्जे में ले लिया था। मंगलवार सुबह जब उसका पोस्टमार्टम कराने की बारी आई तब परिजन पोस्टमार्टम न कराने पर अड़ गए। परिजन ट्रांसपोर्टर अरविंद गुप्ता समेत उसके परिजनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग करने लगे। इसके अलावा मृतक की मां को 25 लाख मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की भी मांग की गई। झांसी में बुधवार से वीआईपी मूवमेंट को देखते हुए पुलिस के हाथ-पांव फूल गए हालांकि पुलिस अफसरों ने किसी तरह समझा-बुझाकर परिजनों को राजी किया। प्रशासनिक अधिकारियों के मौखिक आश्वासान के बाद किसी तरह परिजन पोस्टमार्टम कराने को राजी हुए। करीब डेढ़ घंटे चले पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों के हवाले कर दिया गया। बवाल न भड़कने पाए इसे देखते हुए भारी पुलिस बल के साथ शव को अजय के पैतृक गांव रवाना किया गया। दोपहर को शारदा माई की टौरिया में भारी पुलिस बल की मौजूदगी में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। उसके बड़े भाई के पुत्र ने उसको मुखाग्नि दी।
पीठ पर मिले घाव ही घाव
पिछले 51 दिन से लगातार बिस्तर पर पड़े रहने से अजय की पीठ पर घाव ही घाव थे हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसके शरीर के भीतर कोई चोट के निशान नहीं मिले हैं। पोस्टमार्टम में शामिल डॉक्टरों का कहना है कि 51 दिन तक बिस्तर में पड़े होने की वजह से कोई भी चोट के निशान नहीं मिले। अगर उसके शरीर में कोई चोट लगी भी होगी तब तक उसके निशान खत्म हो गए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह साफ नहीं हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि सदमे की वजह से अजय की जान गई हालांकि उसका विसरा सुरक्षित रखा गया है।
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