झांसी। तहसील में दाखिल खारिज के लगभग ढाई सौ अधिक आवेदन लंबित हैं। इनमें से कई को तो आवेदन किए हुए एक साल से अधिक का समय बीत चुका है। मामले का निस्तारण नहीं होेने के कारण आवेदक तहसील के चक्कर काट रहे हैं।
नियमानुसार एक व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को संपत्ति को हस्तांतरित करता है अथवा बेचता है तो संपत्ति की दाखिल खारिज प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही क्रेता को उस संपत्ति का मालिकाना हक मिलता है। दाखिल खारिज नहीं होने पर क्रेता दोबारा से संपत्ति को बेच भी सकता है। दाखिल का मतलब होता है दर्ज करना जबकि खारिज का मतलब निरस्त करना होता है। जिसका मतलब होता है कि संपत्ति पर से विक्रेता के मालिकाना हक को निरस्त कर खरीदार के मालिकाना हक को दर्ज करना। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही खरीदार संपत्ति का असल मालिक बनता है। जिसके चलते संपत्ति का बैनामा होने के बाद से ही लोग तहसील में दाखिल खारिज लगाने के लिए आवेदन करते हैं। लेकिन तहसील प्रशासन के टाल मटोल रवैये के चलते दाखिल खारिज की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। जिसका खमियाजा विक्रेता और क्रेताओं को भुगतना पड़ रहा है। तहसीलदार मनोज कुमार ने बताया कि दाखिल खारिज के मामलों का रोज निस्तारण किया रहा है। रोजाना कई आवेदन आने से संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।