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तांत्रिक, बाबाओं की ऐसी-ऐसी यातनाएं... आईआईटीएन को छुआया गर्म चिमटा, शोधार्थी की आंखों में डाला नींबू का रस

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झांसी। तांत्रिक, बाबाओं के फेर में फंसकर कई लोग अपनी जिंदगी तबाह कर रहे हैं। हाल ये है कि पढ़े-लिखे और बड़े परिवार के लोग भी मनोरोगी को डॉक्टर के पास ले जाने के बजाए झाड़-फूंक कराने पहुंच जाते हैं। फिर इन्हें ऐसी-ऐसी यातनाएं दी जाती हैं कि सुनकर ही रूह कांप जाए। झांसी में ऐसे मामले सामने आए हैं, जब मनोरोगी आईआईटीएन के इलाज के नाम पर तांत्रिक ने गर्म चिमटा छुआया। शोधार्थी की आंखों में नींबू का रस डाला।
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मनोचिकित्सकों का कहना है कि उनके पास आने वाले 70 फीसदी मनोरोगी किसी तांत्रिक, ओझा या बाबा के पास से होकर आते हैं। जिला अस्पताल की मनोचिकित्सक डॉ. शिकाफा जाफरीन ने बताया कि झांसी का एक युवक आईआईटी से इंजीनियरिंग कर रहा है। वह सिजोफ्रेनिया का शिकार हो गया। परिजन उसे तांत्रिक के पास ले गए। तांत्रिक भी कहने लगा कि इस पर किसी का साया है। उसने छात्र को गर्म चिमटा छुआया और बाल नोंचे। कई महीनों तक जब वह ठीक नहीं हुआ तब परिजन अस्पताल लाए। इसी तरह, कैटाटोनिया बीमारी का शिकार शोधार्थी छात्रा की आंखों में तांत्रिक ने नींबू का रस डाला। कई-कई दिनों तक परिजनों ने उसे कमरा बंद रखा। हालत बिगड़ने पर परिजन डॉक्टर के पास लेकर पहुंचे। मनोचिकित्सक डॉ. अमन किशोर ने कहा कि झाड़-फूंक के चक्कर में कई मनोरोगियों की जान पर बन आई। समय पर उन्हें इलाज न मिलन से बीमारी और बढ़ गई।
बीमारी को पांच-छह साल हो जाते तो जीवन भर चलती दवा
मनोचिकित्सक डॉ. अर्जित गौरव ने बताया कि 65 से 70 फीसदी मरीज पहले किसी न किसी तांत्रिक, बाबा के फेर में फंसने के बाद आते हैं। इनमें ज्यादातर रोगी सिजोफ्रेनिया, डिप्रेशन, हिस्टीरिया (इसमें मरीज को मिर्गी व कंपन आता है और तीन-चार घंटे बोलता नहीं है), एक्यूट साइकोसिस आदि बीमारियों से पीड़ित होते हैं। दवाएं शुरू होने के बाद दो से तीन सप्ताह में मरीज में सुधार होने लगता है। जिस बीमारी को पांच-छह साल हो जाते हैं, फिर उन रोगियों को जीवन भर दवाएं खानी पड़ती हैं।
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अभियान शुरू तो डॉक्टर के पास भेजने लगे बाबा
स्वास्थ्य विभाग की ओर से दुआ से दवा तक अभियान चल रहा है। इस अभियान के तहत स्वास्थ्य कर्मचारी झाड़-फूंक होने वाले स्थलों पर जाकर बाबाओं से मनोरोगियों को सरकारी अस्पताल भेजने की अपील करती है। डॉ. शिकाफा ने बताया हर महीने आठ से दस मनोरोगी झाड़-फूंक करने वाले भी अस्पताल भेज रहे हैं।
केस-1
शराब के लती युवक का पांच साल तक मां कराती रही झाड़-फूंक
सीपरी बाजार निवासी युवक शराब का लती था। युवक की मां उसकी पत्नी से कहती रही कि किसी ने कुछ खिला दिया है। इसलिए वो नशा करने लगा है। करीब पांच साल तक मां एक से दूसरे बाबा के पास जाकर झाड़-फूंक कराती रही। एक दिन पत्नी बहाने से उसे जिला अस्पताल लाई। भर्ती कर इलाज किया गया। फिर युवक ने शराब छोड़ दी।
केस-2
सिजोफ्रेनिया रोगी को भूत-प्रेत का चक्कर मान बाबा को दिखाते रहे
शहर की रहने वाली महिला को सिजोफ्रेनिया बीमारी है। उसके परिजन चार सालों तक भूत-प्रेत का चक्कर समझकर कभी तांत्रिक तो कभी बाबा के पास ले जाते रहे। उसे कुछ आराम नहीं मिला तो किसी रिश्तेदार ने सलाह दी कि एक बार मनोचिकित्सक को दिखा लो। तब जाकर परिजन डॉक्टर के पास आए। अब उसकी दवाएं चल रही हैं। पहले से ठीक है।
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