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महारानी लक्ष्मीबाई के नाम पर रखा जाए स्टेशन का नाम

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झांसी। ग्वालियर रोड क्रॉसिंग पर हर समय जाम की समस्या रहती है, जिससे लोग परेशान रहते हैं। इस गेट पर आरपीएफ की तैनाती होनी चाहिए, ताकि गेट खुलने के वक्त वाहन क्रम से गुजर सकें। झांसी रेलवे स्टेशन का वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई के नाम पर रखा जाना चाहिए। ऐसे ही कई अहम सुझाव बृहस्पतिवार को डीआरएम कार्यालय सभागार में आयोजित मंडल रेल उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समिति की बैठक में सदस्यों ने रखे ।
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डीआरएम आशुतोष की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में सदस्यों ने दतिया गेट फिल्टर क्रासिंग पर अंडर पास बनाने, चिरगांव स्टेशन पर साबरमती, कुशीनगर समेत अन्य ट्रेनों का ठहराव, निवाड़ी व चित्रकूट स्टेशन पर राष्ट्रीय ध्वज लगाने, प्लेटफार्म चार पांच पर रैंप बनाने, आरक्षण टिकट काउंटरों की संख्या बढ़ाने, झांसी स्टेशन परिसर में पीने के पानी का उचित इंतजाम करने, स्टेशन पर बंद चल रहे भोजनालय का संचालन शीघ्र समेत कई अहम सुझाव दिए। सदस्यों में चंद्रप्रकाश मिश्रा, हरीश मेवाफरोश, नीति शास्त्री, देवेंद्र गुप्ता, जिनेंद्र जैन, विनोद नायक, बसंत अग्रवाल, आशीष कुमार मिश्रा, संजीव अग्रवाल, राजकांतेश वर्मा, संजय वाल्मीकि, प्रदीप कुमार गर्ग, राहुल अग्रवाल, पंकज अग्रवाल, सुरेश कुमार, नीरज श्रीवास्तव, प्रमोद तिवारी, सुरेंद्र नारायण, प्रदीप तिवारी शामिल रहे। इस मौके पर डीआरएम ने बैठक में हुई डेढ़ साल की देरी पर खेद व्यक्त किया।
बैठक में वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक (प्रथम) नवीन दीक्षित, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक (द्वितीय) अखिल शुक्ला, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रविंद्र प्रसाद, वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक शशिकांत त्रिपाठी, वरिष्ठ मंडल सिग्नल एवं दूरसंचार अभियंता (समन्वय) निर्मोद कुमार, वरिष्ठ मंडल अभियंता शोभनाथ, वरिष्ठ मंडल यांत्रिक इंजीनियर करुणेश श्रीवास्तव, वरिष्ठ मंडल विद्युत इंजीनियर रघुनाथ सिंह, मंडल सुरक्षा आयुक्त आलोक कुमार उपस्थित रहे।
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इस तरह बनते हैं सदस्य
वर्तमान में मंडल की समिति में 27 सदस्य हैं। इस समिति में क्षेत्रीय लोकसभा और राज्यसभा सदस्य, चैंबर ऑफ कॉमर्स, ट्रेड एसोसिएशन, उद्योग और कृषि संगठन, विकलांग संस्था की संस्तुति पर सदस्य बनते हैं। इसमें सभी का कोटा निर्धारित है। इसके अलावा रेल मंत्री द्वारा विशेष अभिरुचि श्रेणी के अंतर्गत समिति में कितने भी सदस्य रखे जा सकते हैं। एक सदस्य का कार्यकाल दो साल का होता है। नियम के तहत दो साल के अंतराल में छह से आठ बैठकें होनी चाहिए। मगर कोरोना महामारी के चलते पिछले डेढ़ साल से इस बैठक का आयोजन नहीं हो पा रहा था।
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