झांसी। नगर निगम का सलाना बजट महापौर एवं पार्षदों के बीच चल रहे गतिरोध में फंस गया है। एक तरफ महापौर जहां कोविड संक्रमण का हवाला देते हुए बजट बैठक कराने को राजी नहीं वहीं, कार्यकारिणी पार्षद बैठक कराने पर अड़े हैं। पार्षदों ने शुक्रवार को एक पत्र देते हुए महापौर से कहा है कि लखनऊ, प्रयागराज, बरेली एवं आगरा जैसे निगमों ने इसी काल में बजट बैठक करा चुके, ऐसे में उनसे सीख ली जाए और यहां भी बैठक कराई जाए। पार्षदों ने इन निगमों का हवाला देते हुए अब गेंद महापौर के पाले में खिसका दी है।
नगर निगम अधिनियम के मुताबिक वित्तीय वर्ष का बजट पहले कार्यकारिणी एवं उसके बाद निगम सदन से पारित कराना जरूरी होता है। नियमता इसे वित्तीय वर्ष आरंभ होने से पहले कराना होता है लेकिन, वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही के करीब खत्म होने तक भी बजट कार्यकारिणी के सामने भी नहीं आया। पार्षद इस मुद्दे को लेकर आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। उनका आरोप है महापौर रामतीर्थ सिंघल बिना कार्यकारिणी के सामने लाए बजट मंजूर कराना चाहते हैं। कार्यकारिणी सदस्य विकास खत्री, महेश गौतम, दिनेश सिंह दीपू, विमल किशोर एवं उमेश जोशी ने एक पत्र में लखनऊ, प्रयागराज, आगरा, कानपुर आदि निगमों का हवाला देते हुए महापौर से तत्काल कार्यकारिणी बैठक बुलाने की मांग की है। पार्षद विकास खत्री एवं महेश गौतम का कहना है सभी निगमों में कोविड प्रोटोकाल के मुताबिक बैठक बुलाकर बजट पारित कराया गया जबकि यहां कोविड की आड़ लेकर महापौर बचने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, महापौर रामतीर्थ सिंघल का कहना है कोविड संक्रमण को देखते हुए अभी बजट बैठक बुलाना संभव नहीं है। उनका कहना है कि अधिनियम के मुताबिक विशेष परिस्थितियोें में नगर आयुक्त का बजट भी मान्य होता है।