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...पढ़ो यदि पढ़ सको युद्धों के दुष्परिणाम की चिट्ठी

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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ, इसमें देश के नामचीन कवियों ने काव्यपाठ कर श्रोताओं को आनंदित किया। बाराबंकी के कवि प्रियांशु गजेंद्र ने कहा कि न पढ़ना तुम कभी जग के महासंग्राम की चिट्ठी, पढ़ो यदि पढ़ सको युद्धों के दुष्परिणाम की चिट्ठी रचना सुनाई।
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अमिता साहित्यिक कवि मंच के सहयोग से हुए सम्मेलन में कवि वैभव दुबे ने सत्य, अहिंसा के रास्ते पर, हर पल चलता जाता है, अपना सुख अपनी खुशियां भी गैरों को दे आता है रचना पढ़ी। शायर आजाद अंजान ने पढ़ा मुझे अहसास है तो फिर उसे भी हो रहा होगा, इधर दिन रो रहा है तो उधर भी रो रहा होगा। इसी तरह, विवेक बरसैंया ने प्रेम में मान या अपमान कहां होता है, दर्द होता है समाधान कहां होता है, अभिषेक सरल श्रीवास्तव ने आस छोड़ दो अब कोई अवतार लेकर नहीं आएगा, रणभूमि की रणभेरी में कोई मधुर राग नहीं सुनाएगा, अर्जुन सिंह चांद ने जब भी मैंने प्रियवर तुमको यूं ही बरबस देखा है, तब-तब तुमको न जाने क्यों अक्सर नर्वस देखा है, डॉ. मो. नईम ने माता-पिता की आंख की पुतली हैं बेटियां, जलते हुए चिराग की रोशनी हैं बेटियां पढ़कर काव्यपाठ में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती के अवसर पर हुई पोस्टर, पेंटिंग, युवा संवाद, युवा कवि सम्मेलन के विजेताओं को सम्मानित किया गया। इस दौरान हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. पुनीत बिसारिया, प्रो. सुनील काबिया, प्रो. सीबी सिंह, दिव्यांशु दिव्य, मेघा मिश्रा, निजिता, पंकज चतुर्वेदी, अपूर्वा गुप्ता, अंकुर पाठक, रिंकू पांचाल, सपना शर्मा, गोपाल गुप्ता, रामेंद्र सोनी, डॉ. सुनीता मौजूद रहे।
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