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पुष्य नक्षत्र में हुआ सिद्धेश्वर मंदिर का निर्माण

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ग्वालियर मार्ग पर स्थित सिद्देश्वर मंदिर । अमर उजाला
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बीस साल में पूरा हुआ था सिद्धेश्वर मंदिर का निर्माण
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झांसी। ग्वालियर मार्ग स्थित सिद्धेश्वर मंदिर का निर्माण बीस साल में पूरा हो पाया था। क्योंकि, मंदिर का निर्माण कार्य प्रत्येक माह के पुष्य नक्षत्र में ही होता था। बाकी, दिनों काम बंद रहता था। श्री यंत्र की आकृति का ये मंदिर शिव भक्तों की आस्था का बड़ा केंद्र है। शिवरात्रि पर यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है।
झांसी के प्रथम सांसद रघुनाथ विनायक धुलेकर की अगुवाई में सिद्धेश्वर मंदिर का निर्माण 1930 में शुरू हुआ था। निर्माण प्रत्येक माह एक दिन पड़ने वाले पुष्य नक्षत्र में ही होता था, जिससे निर्माण बीस साल में पूरा हो पाया था। मंदिर की आकृति श्री यंत्र की है, जिसे आर्थिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा मंदिर परिसर में मां पीतांबरा, हनुमान जी, साईंबाबा, दुर्गा माता, भगवान परशुराम आदि की प्रतिमाएं भी विराजमान हैं। सामान्य दिनों में भी यहां दिन भर भक्तों का आवागमन लगा रहता है। जबकि, शिवरात्रि पर भक्तों की दिन भर लंबी-लंबी कतारें लगी रहती हैं।
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मंदिर के पुजारी महानगर धर्माचार्य आचार्य हरिओम पाठक ने बताया कि शिवरात्रि बृहस्पतिवार की है। बुधवार की रात बारह बजे शिवजी की भस्म आरती होगी। इसके बाद कांवरियों द्वारा लाए गए बेतवा के जल से शिवजी का अभिषेक होगा। अभिषेक का क्रम रात भर जारी रहेगी। अगले दिन शिवरात्रि पर दिन भर पूजन - अर्चन व अभिषेक की प्रक्रिया जारी रहेगी।
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