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विदेशों से कच्चा माल न आने से घटा खाद का उत्पादन, बढ़ गया संकट

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झांसी। विदेशों से आने वाले रासायनिक खाद के कच्चे माल के दामों में बढ़ोत्तरी होने के कारण पहले तो केंद्र सरकार ने उर्वरक के दामों में बढ़ोत्तरी कर दी। लेकिन जब बढ़े दामों का विरोध शुरू हुआ तो 500 रुपये सब्सिडी बढ़ा दी। इससे विदेशों से आयात होने वाले कच्चे माल का बजट गड़बड़ा गया और उर्वरक की किल्लत हो गई। रबी फसल के सीजन में खाद की मांग बढ़ गई है, लेकिन आपूर्ति कम होने के कारण समस्या हल होने का नाम नहीं ले रही है।
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उर्वरकों में 90 प्रतिशत तक कच्चा माल विदेशों से आता है। कोरोना काल के कारण विदेशों में कच्चे माल की कीमतों में 90 प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी हो गई। अंतर्राष्ट्रीय दामों में बढ़ोत्तरी होने के कारण डीएपी के दाम 2400 रुपये प्रति पचास किलो की बोरी कर दिए गए। सरकार पांच सौ रुपये छूट देती है। इस कारण किसानों को 1900 रुपये प्रति बोरी डीएपी बेची गई। लेकिन, दाम बढ़ने का विरोध होने लगा। इस पर केंद्र सरकार ने डीएपी के दाम घटाकर 1700 रुपये कर दिए गए। छूट के बाद किसानों को 1200 रुपये में डीएपी फिर से मिलने लगी।
लेकिन, विदेशों से आने वाले कच्चे माल के दामों पर कोई असर नहीं पड़ा। सूत्रों की मानें तो इसी का असर है कि इन दिनों डीएपी की भारी किल्लत चल रही है। विदेशों से उर्वरक के कच्चे माल के आयात में भारी कमी आ गई है। फिलहाल इस स्थिति से उबरने का कोई हल नहीं खोजा गया है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि जल्द ही स्थिति को काबू में कर लिया जाएगा। खाद की दुकानों पर प्वांइट ऑफ सेल मशीनों की मानीटरिंग सख्ती से की जाएगी, खाद बेचते समय किसानों की जोत- बही और स्टाक रजिस्टर पर नजर रखी जाएगी। इस कारण खाद की किल्लत को काफी हद तक कम किया जाएगा।
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