झांसी। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में दिखाने वाले मरीजाें को चिकित्सकों द्वारा लिखी अधिकतर दवाएं दवा काउंटर पर नहीं मिल रहीं है। जिसके चलते मरीजों को निजी केमिस्ट से दवाओं को खरीदना पड़ रहा है। जबकि मेडिकल प्रशासन द्वारा अस्पताल में 840 दवाइयां होने का दावा किया जा रहा है।
महारानी मेडिकल कॉलेज में महानगर के अलावा समूचे बुंदेलखंड क्षेत्र के शहरी व ग्रामीण इलाकों से लोग इलाज कराने के लिए आते हैं। जिसके चलते अस्पताल में हर समय मरीजों की भरमार रहती है। अस्पताल की ओपीडी में रोजाना लगभग तीन हजार मरीजों को चिकित्सकों द्वारा परामर्श दिया जाता है। ओपीडी में परामर्श के दौरान डॉक्टरों द्वारा मरीजों को दवाइयां लिखी जाती हैं। जिसे अस्पताल के दवा काउंटर से वितरित किया जाता है। लेकिन चिकित्सकों द्वारा मरीजों के पर्चे पर लिखी हुईं अधिकतर दवाएं दवा काउंटर पर नहीं मिलती हैं। जिसके चलते मरीजों और तीमारदारों को निजी केमिस्ट से दवाओं को खरीदना पड़ रहा है।
इस संबंध में अस्पताल के प्रधानाचार्य डॉ. एनएस सेंगर ने बताया कि अस्पताल में 840 किस्म की दवाएं मौजूद हैं। चिकित्सकों को भी बाहर की दवाएं नहीं लिखने की हिदायत दी गई है। मरीजों की परेशानी का दूर करने के लिए दवा काउंटर पर मौजूद दवाओं की सूची को चस्पा किया जाएगा।
अपने पुत्र को ओपीडी में दिखने के लिए आईं हूं। एक घंटे से अधिक समय तक लाइन में लगी रहीं। लेकिन डॉक्टरों द्वारा लिखी गई पांच दवाओं में से सिर्फ दो दवा ही मिली हैं।
सीमा, बनगुआं
बुखार और बदन दर्द होने पर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों को दिखाने के लिए आई थी। दवा काउंटर पर सिर्फ एक ही दवा मिली है। चार दवाएं बाहर से लेना पड़ेंगी
गायत्री, खुशीपुरा
दवा काउंटर पर दो घंटे से लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। जब नंबर आया तो बताया गया की पांच में से सिर्फ दो दवाएं ही मौजूद हैं।
मुबारक, शिवाजी नगर
गले में जकड़न होने की शिकायत पर अस्पताल में डॉक्टरों को दिखाने आए हैं। पहले ओपीडी में लाइन में लगे रहे अब दवाई काउंटर पर लगे हुए हैं।
विवेक, गरौठा