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पैसेंजर बोले.. हमें तो बस प्लेटफार्म पर ही दिखती है पुलिस

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झांसी। पुष्पक व पटना इंदौर एक्सप्रेस में लूट की घटनाओं के बाद से दूसरी गाड़ियों के मुसाफिर भी दहशत में हैं। उनका कहना है कि रेलवे स्टेशन व प्लेटफार्म पर तो पुलिस दिखाई दे जाती है लेकिन ट्रेन में नजर नहीं आती है। हर ट्रेन में सुरक्षा का इंतजाम होना चाहिए, तभी ट्रेनों में अपराध कम हो सकते हैं।
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ट्रेनों में सबसे ज्यादा महिला यात्री अपराधों का शिकार बनतीं हैं। मेहनत की कमाई को बदमाश पल भर में ले जाते हैं। ट्रेनों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए।
अनुष्का सिंह, यात्री।
ट्रेनों में रात के वक्त चलने वाले सिपाही अक्सर एसी कोचों में जाकर सो जाते हैं। ड्यूटी के दौरान सिपाही सतर्क रहे। उनकी निगरानी होनी चाहिए।
साधना सिंह, यात्री।
ट्रेनों में अपराध बढ़ते जा रहे हैं। इन अपराधों को नियंत्रित करने के लिए हर ट्रेन में पुलिस की चौकी होनी चाहिए, जिसमें कम से कम छह से आठ सिपाही होने चाहिए।
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पूजा, यात्री।
रेलवे वीआईपी ट्रेनों में सुरक्षा का इंतजाम ज्यादा रखती है। मेल व पैसेंजर ट्रेनों में सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं होता है। यह भेदभाव खत्म होना चाहिए।
जय हिंद सिंह राजपूत, यात्री।
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