झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज में एमबीबीएस में प्रवेश के नाम पर उजागर हुए फर्जीवाड़ा में ओपीडी का कमरा नंबर-142 संदेह के घेरे में आ गया। सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर ओपीडी का यही कमरा दो दिन खुला मिला। आशंका जताई जा रही जालसाजों ने इसका इस्तेमाल कार्यालय के तौर पर किया। यहीं से छात्रों संग ठगी हुई। शातिर जालसाजों ने कालेज का ताला तोड़कर वहां अपना ताला लगा दिया था। उधर, मेडिकल कालेज प्रशासन ने पूरे मामले की पड़ताल के लिए प्रमुख अधीक्षक की अगुवाई में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है।
एमबीबीएस में प्रवेश के नाम पर मंगलवार को एक बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ था। महाराष्ट्र की एक छात्रा ने मेडिकल कॉलेज प्राचार्य से सीट एलॉटमेंट के बावजूद एमबीबीएस में प्रवेश न देने की शिकायत की। प्राचार्य ने हैरानी जताते हुए बताया कि सूची में जिनके नाम होते हैं, सभी को प्रवेश मिलता है। जब उन्होंने सूची दिखाई तब छात्रा का नाम उसमें नहीं था। इसके बाद छात्रा ने फर्जीवाड़े का किस्सा बताया। मालूम चला 23 और 24 मार्च कोे एक कमरे का ताला तोड़कर उसमें नया ताला लगाया गया। बुधवार को जब जांच शुरू हुई तब सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। इसमें मालूम चला कि
बाल रोग विभाग की ओपीडी का कक्ष संख्या 142 का ताला दोपहर दो बजे के बाद खुलता था। यहीं पर शाम पांच बजे तक लोग रहते थे। आशंका जताई जा रही कि जालसाजों ने ओपीडी के इसी कमरे का इस्तेमाल ऑफिस के तौर पर किया। उधर, प्राचार्य डॉ.एनएस सेंगर का कहना है कि पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। इनको तीन दिन में रिपोर्ट देने को कहा गया है। पुलिस को भी सीसीटीवी फुटेज मुहैया कराई गई है। पुलिस ने भी अपने स्तर पर जांच शुरू कर दी है।