करगुवां की पहाड़ी नो कंस्ट्रक्शन जोन बन सकती है। इसके लिए जिलाधिकारी ने कमेटी का गठन कर रिपोर्ट मांगी है। इसके अलावा जिलाधिकारी ने मंगलवार को राजस्व अमले के साथ पहाड़ी का निरीक्षण कर हालात देखे। उन्होंने अभिलेखों की भी जांच की।
कानपुर रोड पर महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज के सामने स्थित करगुवां की पहाड़ी को खोद कर यहां भवन बना लिए गए हैं। पिछले सप्ताह ये पहाड़ी तब चर्चा में आई, जब खनन के दौरान मिट्टी में दबकर दो मजदूरों की मौत हो गई। घटना के बाद अमर उजाला की टीम ने मौके पर पहुंचकर पड़ताल की तो भयावह हालात सामने आए। कुदरत के साथ हुई इस हिंसा के मुद्दे को सिलसिलेवार ढंग से खबरें प्रकाशित कर उठाया गया। इसे प्रशासन ने गंभीरता से लिया है।
मंगलवार को जिलाधिकारी शिवसहाय अवस्थी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार सिंह और उप जिलाधिकारी अनुनय झा ने राजस्व अमले के साथ करगुवां पहाड़ी का निरीक्षण किया। इस दौरान पहाड़ी
से जुड़े अभिलेख भी खंगाले गए, जिसमें सामने आया कि यहां निजी भूमि पर मकान बनाए गए हैं। क्षेत्र की 15.994 हेक्टेअर जमीन विभिन्न काश्तकारों के नाम दर्ज है। हालांकि, इस दौरान भारी बारिश के दौरान मिट्टी का पहाड़ गिरने से जनहानि और धनहानि की संभावना जताई गई। इस पर डीएम ने करगुवां पहाड़ी वाले इलाके को नो कंस्ट्रक्शन जोन बनाने की बात कही। इस पर विचार करने के लिए अपर नगर मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में टीम का गठन किया गया, जिसमें लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता और पर्यावरण विभाग के लोगों को शामिल किया। डीएम ने कमेटी को क्षेत्र को नो कंस्ट्रक्शन जोन बनाने की संभावनाओं पर विचार कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए।