झांसी। कोरोना काल में जहां एक ओर एजुकेशन लोन लेने वालों की संख्या में भारी कमी आई है, तो वहीं बैंकों का पुराना ऋण भी फंसकर रह गया है। हालात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पहले जहां हर साल बैंकों के पास लोन के लिए 400-500 आवेदन पहुंचते थे, तो वहीं ये संख्या सिमटकर 40-50 ही रह गई है। इतना ही नहीं, बैंकों द्वारा पूर्व के वर्षों में दिया गया 3.87 करोड़ रुपये का एजुकेशन लोन भी फंस गया है।
उच्च शिक्षा की राह में धन की कमी आड़े न आए, इसके लिए बैंकों द्वारा विद्यार्थियों को एजुकेशन लोन उपलब्ध कराया जाता है। ऋण की धनराशि सीधे शिक्षण संस्थान के खाते में भेजी जाती है। अधिकतम चार साल की शैक्षणिक अवधि के लिए ऋण दिया जाता है। इसकी अदायगी पढ़ाई पूरी होने के एक से डेढ़ साल बाद ब्याज समेत किस्तों में करनी होती है। चूंकि, कोरोना काल में शिक्षण संस्थान बंद रहे। खुलने के बाद रिजल्ट जारी होने में विलंब हुआ। साथ ही महामारी के प्रकोप की चलते लोग बाहरी शहरों में जाकर पढ़ाई करने सभी कतराते रहे, इसका सीधा असर एजुकेशन लोन सेक्टर पर पढ़ा है। इसी वित्तीय वर्ष में अप्रैल से लेकर सितंबर माह तक बैंकों के पास एजुकेशन लोन के 47 आवेदन ही पहुुंचे है, वहीं पिछले साल इसी अवधि में 42 ने आवेदन किया था। जबकि, पूर्व के वर्षों में ये संख्या 400-500 तक रहती थी।
इतना ही नहीं, पूर्व में बैंकों की ओर से जारी किए गए कई एजुकेशन लोन भी अब फंसकर रह गए हैं। वर्तमान में जिले में 1,535 शिक्षा ऋण धारक हैं। इनमें 129 ऐसे हैं, जिन्होंने तय अवधि गुजरने के बाद भी ऋण की अदायगी शुरू नहीं की है। इन पर बैंकों की तीन करोड़ सतासी लाख रुपये की रकम फंसी हुई है।
कोरोना काल में एजुकेशन ऋण के आवेदनों में खासी कमी आई है। पूर्व के वर्षों के मुकाबले दस फीसदी ही आवेदन आए हैं। इसके अलावा ऋण की अदायगी में भी कमी देखने को मिल रही है। बैैंकों की ओर से नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है।
- प्रभात शुक्ला, मंडल प्रमुख - पंजाब नेशनल बैंक
केस - 1
जॉब ऑफर मिला, नहीं हुई ज्वाइनिंग
झांसी। शिवाजी नगर निवासी एक विद्यार्थी ने बंगलूरू से बीटेक किया था। इसके लिए उन्होंने एजुकेशन लोन लिया था। पढ़ाई पूरी होने के बाद पिछले साल मार्च में उन्हें दिल्ली की एक कंपनी से जॉब ऑफर भी मिल गया था। लेकिन, इससे पहले कि वे ज्वाइनिंग कर पाते, लॉकडाउन लागू हो गया। तब से अब तक वे नौकरी की तलाश में हैं। इससे वे एजुकेशन लोन की अदायगी भी नहीं कर पा रहे हैं।
केस - 2
जॉब जाने के बाद ऋण की अदायगी हुई बंद
झांसी। सीपरी बाजार निवासी एक विद्यार्थी ने दिल्ली के एक प्रतिष्ठित संस्थान से एमबीए की पढ़ाई थी और दो साल पहले दिल्ली की ही एक कंपनी में उनकी जॉब भी लग गई थी। बैंक से लिए गए एजुकेशन ऋण की उन्होंने अदायगी शुरू कर दी थी। इसी बीच कोरोना काल में वापस अपने घर झांसी आ गए। कुछ समय बाद उनकी जॉब भी चली गई। ऐसे में वे पिछले चार महीने से ऋण की अदायगी नहीं कर पाए हैं। हालांकि, हाल ही उन्हें अहमदाबाद की एक कंपनी से जॉब ऑफर मिला है, जिससे उम्मीद जगी है।